Sunday, 24 July 2016

Madhuwala Biography in hindi By Gaurav kumar Bollywood ki great Actress madhuwala |बॉलीवुड कि बहुत अच्छी और महान अदाकारा मधुवाला | मधुवाला कि जीवनी ?

मधुवाला बायोग्राफी  इन हिंदी by गौरव कुमार 









आज मै आप सबको मधुवाला के बारे में बता रहा हु.
मधुवाला, एक ऐशी अदाकारा . जिसकी अदा का कौन कायल नहीं थे , और आज भी उनकी अदा का कायल है . और आज के दौर में उनकी अदा के कायल लोग .
 मधुवाला एक सुरती के  परी जैसी थी.  मुस्कराहटो और खूबसूरती का पैगाम  लिए एक ऐशी  परी
14 feb 1933 कि delhi  कि जमी पर आई  जिसकी वजूद राजकुमारी जैशा था | हा लेकिन  हकीकत में उसकी जन्म एक ऐशी गरीब मुश्लिम परिवार में हुआ  जहा दो जून कि रोटी के लिए मशकत कर्नू पड़ती थी. जन्म पर न कोई जशन , न कोई ख़ुशी ,  वो पल एक साधारण सी घर कि साधारण सी घटना कि थी., हां लेकिन ये लड़की साधारण  सी नहीं थी.



अम्मी और अब्बा ने मुमताज नाम रख दिया ,  इनकी पूरा नाम  मुमताज बेगम थी  जहा  देल्हावी बचन से हि मुमताज कि हसी  बिखेरती थी |टोटल 11 भाई बहनों में मुमताज पांचवी औलाद थी . इनकी बचपन बहुत हि शख्त और शंघर्स  व्यतीत हुआ | इनकी बचपन में न रजा रानी कि कहानी थी न हि  खिलौने और न हि गुबबारे ?
चौकलेट और  गुरिया तो इनसे कोशे दूर थी..



मुमताज को इस से कोई फर्क नहीं पड़ता था  क्यूंकि  वो तो मुस्कराहट का गहना  पहन कर अवतरित हुई थी | ऐसा मुमताज के लिए कही जाती है ..........................................................




मुहब्बत जिसके दम से थी,
वो इस धरती कि जन्नत थी ,
वो जब भी मुस्कुराती थी 
बहांरे खिलखिलाती................थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,



मुमताज के पिता अताउल्ल्ला  पेशावर से इम्पिरिअल टोबैको कंपनी में काम करते थे |  लेकिन कंपनी के बंद हो जाने से उनको  delhi आना परा  और बेरोजगारी कि ग्रहण परिवार को लग गया | इशी मुशीबत कि घरी में चार भाई बहन भगवान् के प्यारे हो गए थे | मुमताज कि हंशी भी काफूर हो गयी, जैसे उनकी  हशी को किसी कि नजर लग गयी हो.


इस्सी गरीबी कि दौर में अताउल्ला को एक फ़क़ीर कि बात याद आई , जिसने मुमताज को देख कर ये कहा कि ये लड़की बहुत नाम कमाएंगी|इसके माथे पर नूर है.| जाते जाते फ़क़ीर ने मुमताज को देखकर ये कह गया था कि , ये लड़की बहुत नाम करेंगी... ये लड़की बहुत नाम करेंगी|इश्के माथे पर नूर है. जाते जाते फ़क़ीर ने मुमताज के सर  पर हज्न्थ रखते हुए यह कहकर गया था कि तुझसे जल्दी मिलूँगा बम्बई में.\

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मुमताज के पापा को लगा कि सच हि हो तो  , मुमताज तो कोहिनूर है. | अताउल्ला मुमताज को लेकर मुंबई के लिए निकल पड़े ,ताकि वह मुमताज को काम मिल जाए. मुमताज कि माँ, आयशा बेगम को ये रास नहीं आया कि उनकी नाजुक सी बेटी पर  परिवार चलने का दैत्व दिया जाए |

 जब मुमताज को बाम्बे जाने कि बात पत चली तो  वो बहुत खुश हुई  क्यूंकि उसे फिल्मो  का बहुत सुक था बचपन से हि. लेकिन उसे क्या पत था कि ओ आपना बचपन delhi में छोर कर जा रही है.


बाम्बे पहुच कर मुमताज के पिटे उसे बाम्बे टॉकीज लेकर [पहुचे , वहा उस ज़माने कि सफल अभिनेत्री मुमताज शांति कि नजर उस बच्ची पर  पड़ी उन्होंने उसका नाम प्यार से पूछा , यही पल बच्ची मुमताज का टर्निंग पॉइंट था . उसे बसंत फिल्म में 100 रु पर काम मिल गया | मुमताज के पिता का दिमाग तेज था ,उसने कहा ये तो बच्ची के लिए है. इसके साथ मै भी रहूँगा  तब उसे भी 50 रु मिलना तय हुआ . ये उनकी किस्मत बदलने का दिन था |



9 वर्ष कि उम्र में सफल कैरिएर कि शुरुआत कि मुमताज ने  कि थी.| बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस खूब प्रशिधि मिलने लगी . इशी दौरान मुमताज कि मुलाक़ात उस दौर कि एक्ट्रेस देविका रानी से हुई | देविका रानी मुमताज कि सुन्दरता और नि:स्छल  हंशी पर फ़िदा हो गयी और उसे आपने पास बुलाकर बोली__



आज से तुम्हारा नाम मधुवाला होगा|


यही से मुमताज मधुवाला के नाम से पहचानी जाने लगी थी |
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उनकी अदाकारा कि चर्चे चारो तरफ होने लगी थी 1947 में केदार शर्मा ने मधुवाला  को नील कमल  में बतौर लीद रोल  एक्ट्रेस  लेने का निर्णय लिया | हालाँकि उस समय  मधुवाला 14 वर्ष कि थी  कई लोगो का मन्ना था कि ये उम्र लीद रोल के लिए सही नहीं है., फिर भी मधुवाला ने नील कमल में हेरोइन कि काम कि  उनके हीरो राजकपूर थे | ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो कमाल नहीं कर पायी  हा लेकिन मधुवाला कि तारीफ बहुत हुई . परिवार कि मुफुलिशी कि दौर समाप्त हो  gayi thi 


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कमाल अमरोही ने मधुबालाा की खूबसूरत अदाकारी को एक नया आयाम दिया। कमाल अमरोही ने महल फिल्म में मधुबालाा को हिरोइन बनाया जबकी इस फिल्म में सुरैया पहले से साइन की जा चुकी थीं। उनको हटाने का मतलब था 40,000 रूपये का डूबना फिर भी कमाल अमरोही ने मधुबाला के साथ फिल्म बनाई। महल रीलीज हुई और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया। फिल्म का गाना, “आयेगा आने वाला” सबके दिलो दिमाग पर छा गया। कमाल अमरोही की भी बतौर डायरेक्टर ये पहली फिल्म थी। इसी फिल्म से लता मंगेशकर को भी नया आयाम मिला था।



कमाल अमरोही से मधुबालाा का प्यार खूब परवान चढा लेकिन मधुबालाा की किस्मत ऊपर वाले ने न जाने किस हड़बड़ी में लिखी थी। उनकी जिंदगी में सब कुछ था, लेकिन उनकी नज़र से देखें तो उनसे ज्यादा दुखी और परेशान और कोई नही था। बचपन से ही काम में खुद को खपा देने वाली मधुबालाा वक्त से पहले बड़ी हो गई थी। इसी दौर में उन्हें एक ऐसी बीमारी ने ऐसा घेरा कि उनका साथ अंत तक नहीं छोड़ा।\\



प्रसिद्धी के इस दौर में उन्हें अपनी बिमारी को जाहिर करने का भी अधिकार नही था। उनके दिल में छेद हो गया था, जिसका पता एक सुबह खांसी आनेपर मुहं से खून निकलने पर चला। लेकिन पिता की सख्त हिदायत थी कि किसी को इसके बारे में पता नही चलना चाहिये। मधुबालाा ही उस घर की समृद्धी का स्रोत थी।

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फिल्मी दुनिया का चमकता सच यही है कि, कितनो को भीतर ही भीतर मरना पड़ता है। बिमारी का पता चलते ही इंड्रस्टी बाहर का रास्ता दिखा देती। इसलिये मधुबालाा अपना दर्द चुपचाप सहती रही और चमकते संसार को मुस्कराहटें देती रही। दर्द और मुस्कराहटों की ये लुकाछुपी 1954 में बहुत दिनों फिल्म की शुटिंग के दौरान खत्म हो गई। शुटिंग के दौरान ही मधुबालाा को खून की उल्टी हुई जिसकी खबर आग की तरह पूरी फिल्म इंड्रस्टी में फैल गई। हालांकी मधुबालाा की बेहतरीन अदाकारी के आगे ये इस बात का कुछ ज्यादा असर नही हुआ। अपने काम के प्रति उनकी लगन हर सवाल का जवाब था।



एक बहुत ही खास किस्सा यहाँ शेयर करना चाहेंगे जो उनकी एक्टिंग की भूख को बंया करता है। 1954 की ही बात है, मशहूर फिल्मकार बिमल रॉय बिराज बहू बनाने की योजना बना रहे थे। मधुबालाा इसमें काम करना चाहती थीं। लेकिन मधुबालाा का मार्केट रेट बहुत हाई था तो बिमल राय उनके प्राइज रेट देखकर उन्हे इग्नोर कर दिया और उस समय की स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस कामिनी कौशल को साइन कर लिया। मधुबालाा को जब ये पता चला तो वो एक रूपये के साइनिंग अमाउंट पर उस फिल्म में करने को राजी हो गई।


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मधुबालाा ने 12 वर्ष की आयु में फिल्म निर्माता मोहन सिन्हा से कार चलाना सीखा था। वो हॉलीवुड फिल्म की भी प्रशंसक थीं और उन्होने धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलना भी सीखा लिया था। मधुबालाा के अधिकांश गीतों को लता मंगेशकर और आशा भोसले ने गाया है। फिल्म इंडस्ट्रीज में कहा जाता है कि, मधुबालाा लता जी और आशा जी के लिये लकी थीं। 1949 में महल फिल्म में मधुबालाा पर फिल्माया आयेगा आने वाला  गीत ने लता मंगेशकर को बुलंदियो पर पहुँचा दिया था।



उन दिनो आसिफ अपनी फिल्म मुग़ल-ए-आज़म में एक ऐसी अदाकारा को तलाश रहे थे जिसमें मुगलई शानो-शौकत होऔर प्रेम की इंतहा भी। मधुबालाा में ये दोनो ही खूबी थी। उन्होने मधुबालाा और दिलीप कुमार को लेकर मुगले आज़म शुरु की।


ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि, मुग़ल-ए-आज़म को मधुबालाा की अदाकारी ने अमर बना दिया। फिल्म का एक-एक सीन मोहब्बत की रौशनी से रौशन है। मधुबालाा और दिलीप कुमार का रोमांस इस फिल्म से निखर उठा था। मधुबालाा मुगले आज़म की शुटिंग के दौरान बहुत खुश रहती थी। वे दोनों अक्सर लॉन्ग ड्राइव पर जाते थे। लेकिन प्रेम के मामले में किस्मत मधुबालाा पर मेहरबान नही थी। मोहब्बत की रौशनी पर गलतफहमियों का बादल छा जाने से ये रिश्ता अपने अंजाम पर नही पहुँच सका। मुग़ल-ए-आज़म के अंतिम दृश्य में जब मधुबालाा को दिवार में चुना जा रहा था वो निर्विकार खड़ी थी, उसकी आँखें कह रहीं थी कि अब जिंदगी में कुछ नही चाहिये।


मुग़ल-ए-आज़म बनने में वक्त अधिक लग रहा था तो मधुबालाा के पिता ने एक लाख फीस मांगी जबकि उस समय दिलीप कुमार का पारिश्रमिक 50,000 ही था। हालांकी आसिफ ने ये पारिश्रमिक मंजूर कर लिया और बाद में तो मधुबालाा को एक लाख से ज्यादा ही एमाउंट मिला। दिलीप कुमार को भी पांच लाख दिया गया था।
मधुबालाा की किस्मत उनसे लगातार लुका-छिपी का खेल खेल रही थी। एक तरफ तो उनकी सफलता का ग्राफ ऊपर चढ रहा था तो दूसरी तरफ उनका स्वस्थ्य गिरता जा रहा था।



एक तरफ मुगले आज़म, चलती का नाम गाड़ी, मिस्टर एण्ड मिसेज55 जैसी अनेक फिल्में शौहरत की बुलंदियों पर थी और उन्हे विनस ऑफ इंडियन सिनेमा की उपाधी दी जा रही थी वहीँ दूसरी तरफ उनका स्वास्थ लगातार साथ छोड़ रहा था।



अकेलापन भी मधुबालाा को डस रहा था, यूं तो उनके जीवन में कई नायक आये लेकिन मधुबाला को ऐसे साथी की तलाश थी जो उसे उनकी अच्छाईयों और बुराई समेत अपना ले। मधुबाला को उन दिनों किशोर कुमार का साथ बहुत अच्छा लगता था। डॉक्टर्स के अनुसार मधुबाला के पास वक्त बहुत कम था। तबियत बगड़ती देख मधुबालाा को हार्ट सर्जरी के लिये लंदन ले जाया जा रहा था किन्तु उसके पहले किशोर कुमार ने मधुबालाा से कोर्ट मैरिज की और अपनी नई नवेली दुल्हन को लंदन इलाज के लिये भेजा। हालांकि इस रिश्ते से पूरी इन्डस्ट्री खुश नही थी क्योंकि ये एक बेमेल विवाह था। फिलहाल मधुबालाा इलाज कराके वापस भारत आई और किशोर कुमार के साथ रहने लगी लेकिन वहाँ असुविधा की वजह से अपने घर अरेबियन में लौट आई थीं। मौत के फरिश्ते भी उनके घर पर दस्तक देने लगे थे जिसकी आहट हर किसी को सुनाई देने लगी थी। अंतिम समय में वो सब भूल गई थी बस एक चाहत यादे जबां थी कि, मुझे एक बार युसुफ साहब (दिलीप कुमार) को देखना है लेकिन उनकी ये तमन्ना भी अधुरी रह गई।





मोहब्बत की एक बूंद की आखरी ख्वाइश के साथ हिन्दुस्तान की मर्लिन मुनरो 23 फरवरी 1969 को इस दुनिया से रुखसत हो गई। इसी के साथ मुस्कुराहटों के सैलाब और मोहब्बत के पैगाम की कहानी का पटाक्षेप हो गया।
अपने छोटे से जीवनकाल के दौरान मधुबालाा ने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन पर तीन जीवनियां लिखी गई और बहुत से लेख प्रकाशित हुए । उनको इस दुनिया को अलविदा कहे कई दशक बीत गया है लेकिन अपने अनुपम सौन्दर्य और अभिनय की बदौलत आज भी भारतीय सिनेमा की आइकॉन हैं।



1990 में मूवी मैग्जीन द्वारा कराये गये सर्वेक्षण से इस बात का खुलासा हुआ है कि मधुबालाा सभी दौर की अभिनेत्रियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मधुबालाा जैसी सादगी, सहजता, भोलापन, मासूमियत और सबसे बढकर उनकी अल्हड़ खूबसूरती की झलक अब तक किसी भी नायिका में नज़र नही आई। आज भी उनके विडियो यू ट्यूब पर देखे जाते हैं। उनके ब्लैक एण्ड व्हाइट पोस्टर आज भी बहुत बिकते हैं। डाक विभाग ने भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री मधुबालाा की याद में एक डाक टिकट भी जारी किया है।



मधुबालाा की यादगार फिल्में हैं-


बसंत, मुमताज महल, राजपूतानी, नील कमल, पारस, दुलारी, महल, परदेस, हंसते आंसू, मधुबालाा, तराना, बादल, मि. एंड मिसेज 55, राज हठ, गेटवे ऑफ इंडिया, फगुन, काला पानी, हावड़ा ब्रिज, चलती का नाम गाड़ी, दो उस्ताद, जाली नोट, बरसात की रात, मुगल ए आज़म, पासपोर्ट, झुमरु, हाफ टिकट, शराबी, ज्वाला।
मधुबालाा आज भले ही हम सबके बीच में नही हैं किन्तु उनकी आदाकारी और खुशनुमा हंसी अमर है तथा भारतीय फिल्मी संसार की अद्भुत धरोहर है।


मधुबालाा पर दर्शाये कुछ मशहूर गीतों के साथ अपनी कलम को विराम देते हैं……
जब प्यार किया तो डरना क्या…..मोहे पनघट पर नंदलाल छेड़ गयो रे….आयेगा आने वाला……एक लड़की भीगी भागी सी सोती रातों में जागी सी……हाल कैसा है ज़नाब का…..इक परदेशी मेरा दिल ले गया…..मेरा नाम चिन चिन…..मोहब्बत की झूठी कहानी …


Wednesday, 13 July 2016

लियोनार्दो दा विंची का अभिशाप


लियोनार्दो दा विंची का अभिशाप

Bantock... da Vinci

आप लियोनार्दो दा विंची के बारे में जानते हैं. विश्वप्रसिद्ध मोनालिसा पेंटिग बनाने वाला वह कलाकार मध्ययुग का विलक्षण जीनियस व्यक्ति था. वह चित्रकार, मूर्तिकार, आर्कीटेक्ट, शरीर रचना विज्ञानी, डिज़ाइनर, और इंजीनियर था. उसकी विशेषज्ञता कला और विज्ञान के किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, और उसके युग में ऐसा होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी. दा विंची के अनेक समकालीन कई-कई क्षेत्रों में महारत रखते थे. महान चित्रकार माइकलएंजेलों भी इसी प्रकार का जीनियस था.
लेकिन आज हालात बहुत बदल गए हैं. आधुनिक समाज में दा विंची जैसे व्यक्तियों की कुछ खास पूछ-परख नहीं है. उस जैसी असाधारण प्रतिभा रखनेवाले व्यक्ति अब किसी एक क्षेत्र में पूरी तरह मास्टरी हासिल नहीं कर पाते और ज्ञान-विज्ञान केंद्रित हमारे अतिजटिल समाज में वे औसत प्रतिभाशाली व्यक्तियों से पिछड़ जाते हैं.
ऐसा क्यों होता है और दा विंची जैसे व्यक्तियों को इस समस्या से निकलने के उपाय मैं इस लेख में बताऊंगा. इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि क्यों कुछ लोग (जैसे मैं और शायद आप भी) किसी एक विषय या फ़ील्ड में मास्टरी हासिल नहीं कर पाते. इस पोस्ट में मुख्यतः इन बिंदुओं पर चर्चा की जाएगीः
  • क्यों किसी भी फ़ील्ड में कंपिटीशन अधिक होने पर हमारा हौसला पस्त पड़ने लगता है,
  • वे कौन सी एक्टीविटीज़ हैं जो दा विंची के अभिशाप से हमें मुक्त कर सकती हैं, और,
  • गाय, श्वान, और तारा एक्टीविटीज़ में क्या अंतर है।

मल्टी-टैलेंट्ड लोग स्पेशलाइजेशन पर केंद्रित वैश्विक व्यवस्था में अलग-थलग क्यों पड़ जाते हैं?

कुछ डॉक्टर केवल स्पाइनल सर्जरी करते हैं, कुछ मानसिक चिकित्सक महिलाओं के शिज़ोफ़्रेनिया के एक्सपर्ट होते हैं, और कुछ भौतिकविज्ञानी सिर्फ क्वांटम फ़िज़िक्स का ही अध्ययन करते हैं. हमारे समाज में किसी भी विषय की एक फ़ील्ड पर विशेषज्ञता रखनेवाले व्यक्तियों का महत्व और उनकी मांग बढ़ती जा रही है, और इसका बहुत अच्छा कारण है.
ऐसा इसलिए है कि सोलहवीं शताब्दी में दा विंची के काल से ही ज्ञान-विज्ञान का लगातार विस्तार होता जा रहा है. जैसे-जैसे सभी विषयों में जानकारियां और जटिलताएं बढ़ती जा रही हैं वैसे-वैसे उनके अलग-अलग टॉपिक्स पर विशेषज्ञता रखनेवालों का महत्व भी बढ़ रहा है.
स्पानल सर्जन का उदाहरण लेते हैं. स्पाइन से जुड़ी सर्जरी इतनी जटिल और कठिन हो गई है कि अब ऐसे सर्जनों की ज़रूरत पड़ती है जिन्होंने वर्षों तक इससे जुड़े मामलों का ही अध्ययन किया हो, ताकि उनसे किसी भी केस में छोटी-से-छोटी गलती भी न हो सके.
इसका अर्थ यह है कि जिस सर्जन को स्पानल सर्जरी की फ़ील्ड में अपना कैरियर बनाना है वह किसी वाद्य यंत्र को सीखने में या दुनिया भर के बेहतरीन व्यंजन खुद बनाकर खाने के शौक को समय नहीं दे पाएगा. उसे इन दो या तीन चीजों में से एक का ही चुनाव करना होगा क्योंकि तीनों एक्टीविटीज़ बहुत समय मांगती हैं. यदि आप एक बहुत जटिल स्किल डेवलप करना चाहते हैं तो आपको खुद को किसी एक फ़ील्ड में ही समर्पित करना होगा.
मल्टी-टैलेंटेड लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है. उन्हें इससे ही संघर्ष करना है.
मल्टी-टैलेंटेड व्यक्तियों के भीतर उनके हर टैलेंट को साकार करने की इच्छा बहुत तीव्र होती है लेकिन वे इस बात को भली-भांति जानते हैं कि उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा. ऐसे लोग बहुत उत्सुक स्वभाव के होते हैं और  उनकी उत्सुकता उन्हें एक से दूसरे विषय पर भटकाती रहती है, जिसके परिणामस्वरूप वे एक बिंदु पर महारत हासिल करने के लिए ज़रूरी परिश्रम नहीं कर पाते. किसी नई फ़ील्ड की जानकारी मिलने पर वे उत्साह से भर जाते हैं और उसमें गोता लगा देते हैं लेकिन उसके बेसिक्स को सीखने-समझने के दौरान ही उनकी दृष्टि किसी और फ़ील्ड पर पड़ती है और पहली फ़ील्ड में उनकी रूचि और आकर्षण कम पड़ जाता है.
इसे मैं अपने ही उदाहरण से समझाता हूं. किशोरावस्था में मेरी रुचि शास्त्रीय संगीत में जगी और मैंने वायलिन सीखना शुरु कर दिया. कुछ महीनों के भीतर ही मेरा उत्साह कम होने लगा. मैंने वायलिन क्लास जाना बंद कर दिया और मैं किसी दूसरी एक्टीविटी में उलझ गया.

दा विंची व्यक्तित्व के लोग कंपीटीशन से घबराते हैं और उस फ़ील्ड की खोज करते रहते हैं जहां वे अकेले टिके रह सकें.

सधी हुई दृष्टि होने पर जीवन को उसका उद्देश्य मिल जाता है लेकिन दा विंची व्यक्तियों में इस टेंडेंसी का अभाव होता है. वे बार-बार अपनी दिशा बदलते हैं, वे नित-नए शौक पालते रहते हैं और किसी भी नौकरी में टिक नहीं पाते.
क्यों?
क्योंकि वे कंपीटिशन से डरते हैं.
बहुत से लोगों के लिए स्वस्थ कंपीटिशन का होना उनकी स्किल्स को निखारने और उभारने में सहायक होता है, लेकिन दा विंची व्यक्तियों के साथ ऐसा नहीं होता.
किसी भी क्षेत्र में कंपीटिशन होने पर दा विंची व्यक्ति ठीक उसी समय उस फ़ील्ड को छोड़ देते हैं जब चीजें रोचक लगने लगती हैं और उनका हाथ जमने लगता है. वे किसी दूसरे शौक या स्किल पर हाथ आजमाने लगते हैं – और थोड़ा-बहुत सीख जाने पर उनके मन में यह विश्वास घर कर जाता है कि वे उसे फिर कभी पूरी तरह सीख लेंगे… लेकिन वे उसे भी अधूरा छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं.
उदारहण के लिए, यदि वे टेनिस सीखना शुरु करते हैं तो उस सीमा तक प्रेक्टिस करते हैं जब उनका मन यह कहने लगता है कि “यह तो कोई खास मुश्किल नहीं है  – मैं तो जब चाहूं तब बढ़िया टेनिस प्लेयर बन सकता हूं”. इस पॉइंट पर फ़ील्ड को छोड़ देने पर उनके मन में किसी अच्छे प्लेयर को चैलेंज किए बिना ही जीत जाने जैसी गर्वीली अनुभूति बनी रहती है.
इसके साथ ही दा विंची व्यक्ति  आलोचना से भी घबराते हैं. वे इस तथ्य को नहीं समझना चाहते कि हर मास्टर को स्टूडेंट के स्तर से ही शुरुआत करनी पड़ती है. वे फ़ीडबैक को बाधा की तरह लेते हैं. किसी भी काम में जब जटिलता बढ़ जाती है या कठिनाई आने लगती है तब वे उसे पार करके अगले लेवल तक जाने की बजाए अक्सर फ़ील्ड ही चेंज कर देते हैं.
इस प्रकार की दिशाहीनता से दा विंची व्यक्तियों में निराशा जन्म लेने लगती है.
किसी भी एक फ़ील्ड के प्रति समर्पित हो सकने की यह अक्षमता उन्हें कई फ़ील्ड्स की सतही जानकारी होने तक सीमित कर देती है. वे बहुत सी फ़ील्ड्स की औसत जानकारी ही रख पाते हैं फिर भी अपने मन को यह कहकर दिलासा देते हैं कि वे “Jacks of all trades, masters of none” हैं.
इस तरह कई साल तक एक से दूसरी फ़ील्ड पर उछलते-कूदते रहने पर उन्हें यह अहसास होने लगता है कि उन्होंने अपना वक्त बर्बाद कर दिया है. उन्होंने अनेक फ़ील्ड्स की मामूली जानकारियां तो जुटा लीं लेकिन वे किसी भी विषय की गहराई में नहीं गए. इससे भी बुरी बात यह है कि वे यह कभी जान ही नहीं पाए कि उनकी योग्यता किस क्षेत्र में थी. प्रौढ़ावस्था तक पहुचते-पहुंचते उनकी निराशा गहराने लगती है क्योंकि वे यह जान जाते हैं कि उनके पास अब बहुत अधिक समय नहीं बचा, और वे अभी भी अपने तमाम तरह के टैलेंट को व्यर्थ होते देखते रहते हैं.

दा विंची के अभिशाप से मुक्ति पाने के लिए ऐसी एक्टीविटी खोजिए जो आपके अधिक-से-अधिक टैलेंट को समाहित करती हो.

यदि आप भी मेरी तरह हैं और खुद को दा विंची समुदाय से जुड़ा महसूस करते हैं तो इस समस्या का समाधान आप कैसे करेंगे? दा विंची  के अभिशाप से मुक्ति कैसे मिलेगी?
इसके लिए आपको सिर्फ इतना करना है कि आप पर्याप्त रूप से जटिल कोई ऐसी एक्टीविटी खोजें जिसमें आपके अधिक-से-अधिक टैलेंट्स शामिल किए जा सकें.
दा विंची व्यक्तियों की पर्सनालिटी जटिल होती है और जटिलता भरी चीजें या टास्क ही उन्हें संतुष्ट करते हैं. यदि उस टास्क में ऐसी बातें नहीं हैं जो उनके अलग-अलग टैलेंट्स से जुड़ी हों तो उनका ध्यान भटकने लगेगा और वे उस टास्क में रुचि नहीं लेंगे.
मैं इसे अपने उदाहरण से समझाता हूं. मैं एक टिपिकल दा विंची व्यक्तित्व हूं और मैंने सैंकड़ों तरह की चीजें आजमाकर देखी हैं. मैंने टीचिंग, पत्रकारिता, मार्केटिंग, फ्रीलांसिग और पब्लिक सेक्टर में नौकरी करने से लेकर तमाम तरह की हॉबीज़ और इंट्रेस्ट पाले – लेकिन मैं कभी भी यह नहीं जान पाया कि वह कौन सा एकमात्र कार्य था जो मुझे करते रहना चाहिए था.
एक दिन मैंने बैठे-ठाले सर्फिंग करने के दौरान ही एक ब्लॉग बना लिया जिसमें मैं उन अबूझ सी कहानियों का अनुवाद डालने लगा जो बहुत कम ही पढ़ी जाती थीं या बहुत कम पढ़ने में आती थीं. शुरुआत में यह सब करना बहुत कठिन था. इसमें कई तकनीकी चुनौतियां थीं. सामग्री को जुटाने के लिए बहुत सर्च करनी पड़ती थी. यह भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा काम था. लेकिन इस काम ने मुझे दा विंची के अभिशाप से मुक्ति दिलाने में मदद की. इस काम में मैंने अपनी साहित्यिक और भाषिक क्षमताओं का उपयोग किया. तकनीकी काम में शुरु से ही रुचि होने के कारण मैंने ब्लॉगिंग से जुड़ी कठिनाइयों का समाधान खोजने के लिए अपन प्रॉब्लम-सॉल्विंग एप्रोच की मदद ली. ब्लॉगिंग ही पिछले नौ सालों से वह एकमात्र एक्टीविटी है जिसमें में टिके रह पाया और उन्नति करता रहा.
ये तो रही मेरी कहानी. आपकी कहानी क्या है?
अब मैं आपको यह बताऊंगा कि किस तरह कोई भी व्यक्ति एक तार्किक पद्धति का उपयोग करके यह पता लगा सकता है कि उसके लिए क्या करना सही रहेगा. उन उपायों ये वह यह पता लगा सकेगा कि उसका वास्तविक उद्देश्य क्या है.

अपने उद्देश्य का पता लगाने के लिए आपको पहले एक लंबी विश लिस्ट और फिर एक छोटी लिस्ट बनानी होगी.

इस विधि में तीन स्टेप्स हैं, जिनमें से पहली स्टेप को मैं प्रीसेलेक्शन स्टेप कहता हूं. प्रीसेलेक्शन के दौरान आपको उन एक्टीविटीज़ की बड़ी लिस्ट बनानी है जो आप करना पसंद करते हैं.
कुछ पलों के लिए यह कल्पना कीजिए कि आपके पास बेहिसाब समय और धन है. ऐसे में आप अपनी ज़िंदगी किस तरह बिताएंगे? अब लिस्ट में आप अपने दिमाग में आनेवाली सारी सब एक्टीविटीज़ नोट करते जाएं जैसे आपको पसंद आनेवाले काम, हॉबीज़ और वन-टाइम एक्टीविटीज़ जैसे  किसी विश्वप्रसिद्ध यूनीवर्सिटी में पढ़ाई, ऑस्ट्रेलिया में स्कूबा डाइविंग, पैराशूटिंग, पियानो खरीदना, आदि-आदि. इस लिस्ट में आप अपने अजीबोगरीब सपनों को भी लिख सकते हैं जैसे पॉप स्टार बनना या मंगल ग्रह की यात्रा करना.
आपकी ख्वाहिशों और सपनों की लिस्ट बन जानेपर आप प्रीसेलेक्शन की प्रोसेस शुरु कर सकते हैं. इस स्टेज से गुज़रने के लिए आपको हर एक्टीविटी को तीन शर्तों पर परखना हैः 1. क्या यह बहुत रोचक (फ़न) है, 2. क्या आपमें यह टैलेंट है, और 3. क्या आप इससे पैसा कमा सकते हैं?
अपनी लिस्ट को देखिए और उन एक्टीविटीज़ को गोले से मार्क करते जाएं जो इन तीनों शर्तों को पूरा करती हैं. जो एक्टीविटीज़ इन तीनों शर्तों को पूरा नहीं करतीं उन्हें ढोते रहने में कोई सार नहीं है. जिन एक्टीविटीज़ से आपको कोई आमदनी नहीं हो वे सिर्फ हॉबी हैं. रोचक नहीं होने पर भी आपको धनवान बनाने वाली एक्टीविटीज़ करने पर आपको खुशी नहीं मिलेगी. जिस एक्टीविटीज़ के लिए आपमें ज़रूरी टैलेंट ही न हो उसके बारे में सोचकर परेशान क्यों होना?
प्रीसेलेक्शन की स्टेज से गुज़रने के बाद हम अगली स्टेप पर जाकर अपने उद्देश्य की परख कर सकते हैं.

इस स्टेप में हम अपनी लिस्ट की व्यावहारिक दृष्टि से और चरणबद्ध तरीके से जांच-पड़ताल करते हैं.

अपनी पहली लिस्ट में हमने उन चीजों का पता लगाया जो टैलेंट, पैसा और फ़न के दायरे में आती हैं. अब हम अपनी रिल्ट को दो प्रश्न पूछकर थोड़ा और रिफ़ाइन करेंगे. पहलाः हमारी हर एक्टीविटी में पैसा कमाने का कितना पोटेंशियल है? दूसराः हर एक्टीविटी को करने पर हमें कितनी मानसिक संतुष्टि मिलेगी?
इस प्रश्नों का चरणबद्ध तरीके से उत्तर देने के लिए हम BCG मैट्रिक्स पद्धति का उपयोग कर सकते हैं.
BCG मैट्रिक्स पद्धति को इसे विकसित करनेवाले Boston Consulting Group के नाम से जाना जाता है. यह सिस्टम कंपनियों को यह जानने में मदद करता है कि उन्हें किन प्रोडक्ट्स् में इन्वेस्ट करना चाहिए. इसके लिए यह प्रोडक्ट्स् को चार श्रेणियों (गाय, श्वान, तारा, और प्रश्नचिन्ह) में बांटता है. अपनी एक्टीविटीज़ को इन चार कैटेगरीज़ में बांटकर हम उस एक्टीविटी का पता लगा सकते हैं जिसे करते रहना हमारे लिए हर तरह से उपयुक्त होगा.
गाय एक्टीविटीज़ वे हैं जो हमें संपन्न बनाती हैं (जैसे दूध देनेवाली गाय) लेकिन जिन्हें करने में बिल्कुल मज़ा नहीं आता. श्वान एक्टीविटीज़ वे हैं जिनसे हमें किसी तरह का लाभ नहीं होता. आप गाय और श्वान एक्टीविटीज़ को दरकिनार कर सकते हैं लेकिन तारा गतिविधियों को नहीं क्योंकि वे आपके ड्रीम ज़ॉब्स हैं, जो आपको धनवान बनाने के साथ-साथ संतुष्टि भी प्रदान करेंगे.
प्रश्नचिन्ह वाली एक्टीविटीज़ वे हैं जिन्हें आप करना पसंद करते हैं लेकिन जिनसे किसी तरह की आय होने की संभावना न के बराबर है. आप इन एक्टीविटीज़ को कचरे के डिब्बे में नहीं फेंक सकते. आप इन्हें करना ज़ारी रखें और उन तरीकों का पता लगाने की कोशिश करें जो आपको इन एक्टीविटीज़ के ज़रिए कुछ कमाने का अवसर दें. अगर आप लकी होंगे तो एक दिन ये एक्टीविटीज़ आपको बहुत लाभ पहुंचा सकती हैं.
यदि आपने अपनी गाय, श्वान, तारा, और प्रश्नचिन्ह एक्टीविटीज़ को पहचान लिया हो तो हम अब तीसरी और फ़ाइनल स्टेप की ओर बढ़ेंगे.

इसके लिए हमें अपने डर, टालमटोल की आदत, मेंटल ब्लॉक और नारसीसिज्म के बीच संतुलन कायम करना होगा.

पहली दो स्टेप्स ने हमें अपनी प्रिय एक्टीविटीज़ को पहचानने और उनकी परख करने में सहायता की. तीसरी स्टेप में हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारा बनाया नया प्लान ध्वस्त न हो जाए. चलिए देखते हैं कि हमें अपनी कार्ययोजना को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए किन बाधाओं को पार करना ज़रूरी है.
सबसे पहले हमें थोड़ा भय चाहिए… थोड़ा सा डर… ज्यादा नहीं.
यदि आपकी नई योजना आपको ज़रा सा भी भयभीत नहीं करती तो वह पर्याप्त महत्वाकांक्षी योजना नहीं है. और यदि वह महत्वाकांक्षी नहीं है तो आपको खुशी नहीं दे पाएगी.
वहीं दूसरी ओर यदि आप अपनी योजना को लेकर अधिक भयभीत हो तो आपने सायद बहुत ऊंचे मंसूबे बना लिए हैं. आपको अपनी योजना को पुनरावलोकन तब तक करना चाहिए जब तक आप किसी संतुलन तक नहीं पहुंच जाओ… वह संतुलन जहां भय न तो अस्पष्ट हो और न ही प्रचंड हो.
दूसरी ज़रूरी चीज़ यह है कि हम टालमटोल करने से पूरी तरह से बचें. यदि हम टालमटोल करते रहेंगे तो हम अपने लक्ष्य की दिशा में एक कदम भी नहीं चल सकेंगे. किसी-किसी दिन थोड़ा आलसी हो जाना चलता है लेकिन इसे अपनी आदत बना लेना बहुत बुरा होगा.
तीसरा, हमें अपने क्रिएटिव ब्लॉक पर जीत हासिल करनी होगी. हम सभी अपने महत्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट पर मन लगाकर काम कर रहे होते हैं पर किसी दिन हमें अचानक यह अहसास होता है कि हमारी सारी इन्सपिरेशन गायब हो गई है. लोगों को लगता है कि ऐसा आलस के कारण होता है लेकिन यह गलत तथ्य है. असल में होता यह है कि हम यह भूल जाते हैं कि क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं. इस क्रिएटिव ब्लॉक से छुटकारा पाने के लिए हमें उस बात की तह तक दोबारा जाकर देखना चाहिए जिसने हमें उस काम में जी-जान से जुट जाने के लिए प्रेरित किया था.
और अंत में हमें अपने नारसीसिज्म को संभालना होगा. नारसीसिज्म का मलतब है खुद पर हद से0 ज्यादा गुमान होना या खुद को ही सबसे अधिक पसंद करना. हम सभी में आत्मसम्मान की स्वस्थ भावना होनी ही चाहिए लेकिन कभी-कभी यह इतने गहरे अहंकार में बदल जाती है कि उन्माद या तनाव का कारण बन जाती है. जब हम खुद को या खुद की काबिलियत को लेकर बहुत ऊंचा सोचने लगते हैं तो हमारा व्यवहार विचित्र हो जाता है. ऐसी स्थिति में हम किसी ऐसे व्यक्ति की तरह व्यवहार करने लगते हैं जिसपर कोई जुनून सवार हो गया हो. इस दशा में कुछ समय तक काम करने के बाद जब हमारा सामना वास्तविकता से होता है तो हम डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं क्योंकि हमने बिना सोचेसमझे ही इतने विराट लक्ष्य बना लिए थे जिन्हें पूरा करना हमारे लिए संभव नहीं था.




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Monday, 11 July 2016

Intelligent kaise bane? how to intelligent

Intelligent kaise bane?    how to intelligent






















 Hello friends  !  RAdiantgaurav   aapke sath  prepration se related   bahut hiimprotant cheej share kar rahe hai..................................... kahi aap is baat ko samjh rahe honge ki aaja kal har insaan me ek intelligens ka hona bahut jaruri hai . jo hamare liye bahut jaruri hai.. aajkal ke time me har insaan ko intelligent hona bahut jaruri hai .  jaruri kya hame intelligent hona hi chahiye.. koi insaan  aagar kisi bhi ek field me kamjor rah jaye to wo  insaan aapne zindagi ke race me  bahut piche rah jaate hai . 
fir chahe o koi ho. aaj student ka value jyda hai , chahe o student hi kyu na ho, ya bussiness man  ho ya aam  admi.... chahe sports ho ya study........ bussiness ho  ya partnership   aagar aap intelligent ho to aapka kaam bilkul asaani se mannege ho jaata hai. aaur aap aapne kaam aur game aapne study ko enjoy kar paate hai , aur usme behtar kar paate hai... aur aap aapni intelligens ki wajah se hi , aap  bahuto ko chhor kar aapne aap ko behatar bana paate hai...  wahi ek  aisha aadmi jo intelligens ke mamle me pichhe raha jaat hai.. aur wahi insaan hamesha paresaan rahta hai , aur frustration ka sikaar ho jaata hai.           kyunki us se koi bhi kaam us trah se nahi kar paata hai  , jo o jis trah se chahta hai , ki ham is trah se is kaam ko kare, but o kar nahi paata hai,     
o chahta to hai , ki mai is kaam ko achhe se karunga , but o kar nahi pata hai, kyu ki o frusration ka sikaar  hai, kyunki ki usme utni inttelins nahi , aur use aapne aaap par belief bhi thora kaam hai9. 
isliye kuch bhi karne ke liye intelligens jaruri hai. isliye aap aapna pahle intelligens ko achha kijiye. achive power ko  badhaiye......
  aur last me ye hota hota hai. due to lack intelligence.



     so ham aapni is study help and guidance and stori , insprational stori ki shuruaat  in hindi  website ki   shuruaati ke baad mai aapko ek toppick ke baare me bata raha hu. ki bakai me aap intelligens kase bane.. ....      
 dosto, is post ko aap dhyan se padhiye  aur is article me bataye huye points ko  samajh kar aapne zindagi me apply  kijiye/... bahut positive result milega aapko , is baat ki guarantee hai .     aapko jarur positive result milega...


 aur haa jab ye aapko achha lage tab aap ise aaapne friends ko bhi bataye.












Intelligent banne ka trick  or tarika 


1. books aur newspapers padhte rahe   .......

Aaj ke time me sabse improtant requirement ho  gayi hai. iski improtance life me har jagah hoti hai.
har comptition  exam me  current affairrs section me sabhi  question recent news and incidents  se related hi aate hai  , so regular newspaper aur books reading karne ki aadat daliye.
aagar aap aisha sochte hai ki exam ke time par koi book lekar padh lenge, , usmwe utna achha nahi banegi, jo but regular updates rahne se hoga, so aap regular hi, padhe books aur newspaper .... dosto, jamana bahut tej chal raha hai  isliye  aapko current news , General knowledge , poltics Games etc ke baare me puche jaane par pta hona chahye . iske bajah se aap aapne school  ya college group me sabse behtar banoge , aaur aapki dristi kisi ke traph rakhne ki jarurat nahi padegi, sabki drishti aapke traf rahengoi..   let us>.. aapke office me kisi discursion ke dauraan  aapke boss ne  recently hui kisi  incident ke baare me puch liya , aur aapko uske baare me kuch pata nahi hai. to kitna Embrrassing feel hoga ye aap samjh sakte hai.
 so,  the points , regular book , newspaper ke sath updates rahiye  and tv ke sath bhi.it's necessary  and also good for yyou future.  is traha se aapne aap paas hone wale cheeje se updates rahna hoga.. jaise ki next entrance exam kab hone wala hai , recently hui Exam me cut off kitni rahi  aur admissions ke liye kaun saa school ya college best hai ya hoga . ye sab bahut hi jaruri hai , jaankaari rakhna.




   2 PRActically sochnA shuru kare

 ::: aur ha koi soche ya nahi aap shuru kar de



koi bhi insaan aapne soch ko develop karna chahta hai, but u kar kyu nahi pata hai. har koi sochta hai ki mera soch sabse utam ho , but o sochta hi rah jaat aahi, lekin uska soch utam nahi ho pata hai, aisha isliye , ko aapni soch ko practically nahi karta hai. aur aapne soch ko develop karne ke liye aapne  soch ko practically karhna hi hoga, aur insaan yahi nahi kar paate hai,.
kisi bhi insan ko aapne soch ka pta tab chalta hai, jab o aapni soch ko practically dekhta hai.. koi bhi kaam karne se pahle hame dimag lagane padte hai. aur dimag ko chalane ke iye practically sochna bahut jaruri hai.. aaj ki duniya me paractcally sochna bahut jaruri hai. itna ki bagair soche nahi ho sakta hai, ya mind ko develop nahi kiya jaa sakta hai., so if you want ki is 21 st cencuri me aapke har faisale ko sab passand karte ho. aapko aapni soch ko practically sochne ki koshis karni hi chahiye.. jo  bhi kaam aap karne ki koshis karte hai  uski  feasibility kitni hai , is baat ka bhi dhyan rakhna hi chahiye ki utna hi hame jaruri hai. jitna uske baare me planning karna . aapne thoughts kev sath clear rahna sikhna chahiye. kabhi bhi kisi cheej ko lekar confussion nahi rakhni chahiye, warna aap jaane anjaane me aur bhi galti karti hi jayeng....




Body ko hamesha fit rakhe.....;;;;;;;;:::

dosto, aapne jarur suna hi hoga ki Ek healthy body me hi ek healthy  dimag basta hai. to iske liye aapke body ko heldi rahna bahut jaruri hai.. ham ye nahi kar rahe hai ki aap jym jaa  kar aapna mussals banaye , mera aisha kahna nahi hai. ham ye kah rahe hai ki god ne hame jo body diye hai use hame sunder aur heldi banaye rakhne chahiye , ye hamara furz bhi hai ,aur  jarurat bhi. isse aapka impresion dusro ke samne achha padega. log aapse baat karne ke liye majboor ho jayenge. or iske sath aap samrtly logo se baat karene.. aur isse double impression padega. , log aapse baat karke , aur aapke fit body ko dekhkar aapke intelligens ka pata laga sakenge



Group Discussion

ye aapke life ke liye behad improtant hai.. ye kisi bhi insaan ke life ke liye bahut hi improtant hai. aksar log ye nahi kar paate hai..
Group  discussion ka ek common meaning hai,  aapne  friends ya aapne seniors ke sath kisi topic ke upar serious discussion karna.. unke sath baithne se  aapko logo ka expreence ka pata lagega, ki jaise ki aapke seniours aaj kya kar ke aaj successes ful insaan bane.  kisne kya galti ki  aur aapko aapne life me kis trah se desigens lene chahiye.
group discurssion aap kisi bhi topic par bkar sakte hai, Group discussion  aap current  affairs ya kisi ke exprience ke baare me kar sakte hai  ya aap koi bhi topic par kar sakte hai. issse aapko shikhne ko to milega hi, aur sath  hi sath . aur alag alag log ka soch ka bhi pata chalega., aur o kaise soch rahi hai , aur duniya kitni aage jaa chuki hai.... ye sab karne se aapka dimag to open hoga hi sath me, thinking bhi positive hogi...





Be mature , aap kitne mature hai. kisi bhi mamle me. 

 in sab ke siva bhi ek point hai ki aap kitne mature hai. friends ye to khair aapke upar depend karta hai, ki aap kis mamle me kitna matture karte hai.  ye aapke thinking par depend karta hai. aap kya sochte hai, akhir aapke mind me kya chal raha hai.,  aaap kis type ki baate sochte hai,  ye sab bahut hi mature karta hai. doston, ye aapke upar depend karta hai ki  aapka maturity levele kitna hai., aur haa aap kisi bhi cheej ko kitni asani se samjh sakte hai.. aagar aap mature nahi hai tro aapko aur aapke baate ko koi bhee sriously nahi lega.. kisi ko impress karne ke liye  chahe o ladki ho ya aapki boss  YA APKA koi senior  aapni soch aur aur behaviour ko mature banana padega.;..... all right...



MAke  a schedule:::_



 Is duniya me 75% se jyada log is baat ka dhyaan nahi rakhte aur yhi karan hai ki   is duniya me bahut kam log hi, super  successful bante hai. ek insaan jo koi naukari karta hai , aur har mahine milne wali  paisho se aapna parivaar chalata hai ., vo ek common main hai. ha leki successesful ek alag hi class hoti hai. successful aur common logon ke beech ka sabse bada fark create krta hai sheduale.
aap bhi aapni life me ek aam admi nahi ek safal insaan banana chahte hai. to sheduale ke hissab se chalan shuru kar dijiye. issse koi fark nahi padta ki aap 10 trh class ki  ke student hai  ya kisi company ka ceo , aap tab tak safal nhi ho sakte , jab tak aapko  aapne shedule ka sahi pata nahi hoga. safal logo ke pass ek ek minute ka sheduale hota hai. kab sona hai kab uthana hai, kab exercise karni hai. kab party me jaana hai. aur kab kaam karna hai. wo aapne sheduale ko strictly follow karte hai. hame bhi agar safal insaan banna hai to , hame bhi ek safal insaan banna hi padega. is trah se sdafal insaan ke sabhi kaam sahi time pe hote hai. aur sahi tarike se bhi hote hai.aur yahi wajah hai ki o safal kahlaate hai... so, friends start living with your sheduale now. aisha karne se aapka ek minute bhi kharab nahi hoga.. bus aapko aapne aap se  promise karna hoga. chahe jo ho jaaye aap aapne sheduale ko follow karenge... dosto yahi ek intelligens insaan ki nishani hai.  aagar aapko koi bhi problems ho ya dout ho to aap neeche comment karke kabhi bhi kuch bhee puch sakte hai..




 dosto aagar aapko koi bhi problems hoti hai to aap hame  comment kar ke puch le 

good baaye dosto. hamne aapke sath jo article share kiya o bahut hi useful hai...





Friday, 8 July 2016

स्टीव जॉब्स एप्पल कंपनी का संस्थापक [स्टीव जॉब्स ] का स्टोरी , इन्होने कहा कि जीवन कभी -कभी चोट तो देता है , पर आस्था न खोये...

 स्टीव  जॉब्स    एप्पल कंपनी  का  संस्थापक [स्टीव जॉब्स ]  का स्टोरी 

जीवन  कभी - कभी चोट तो देता है , पर आस्था न खोये 

  • यदि सफल होना है , तो किसी का इन्तजार किये बिन अकेले चलना  सीखना होगा..
ये स्टीव जॉब्स जी  ने कहे कि यदि जीवन में सफल होना है ,तो किसी का इन्तजार किये बिना अकेले चलना सीखना होगा.. 















आपको आपने प्रिये तक पहुचना हि चाहिए 

 तकनीक कि दुनिया में युगांतकारी बदलाव् लाने वाले  स्टीव जॉब्स हमेशा कहते थे-- थिंक डीफफ्रेंट.....
जीवन में  संघर्स के जरिये मुकाम हस्सिल करने वाले , जॉब्स ने bussines मॉडल को न्यू परिभाषा दी थी, मतलब न्यू deffinetion  दिया .
वो एषा मानते थे कि अगर जीवन में हमें सफल होना है , तो किसी का इन्तजार किये बिना  अकेले चलना सीखना होगा.
 स्टीव जॉब्स का  कड़ी स्पीच...




स्टीव जॉब्स ::-

                     इन्होने आपने बदौलत  इस दुनिया में एक अलग हि पहचान बनाया . जो आज  बहुत मायेने रखते है..
विश्व के सर्वश्रेष्ट  विश्वविदालय में  सुमार  इस संस्थान  से ग्रेदुअते बन कर आपके निकलते वक्त साथ मौजूद हो कर मै सम्म्मानित महसूस कर रहा हु. मै किसी कॉलेज से ग्रेजुएट नहीं हुआ . सच कहू , तो किसी ग्रेजुएशन तक पहुच पाने का आज हि मौका  मिला  है.  मै अआपके सम्मुख कोई लम्बा व्याखान नहीं दूंगा , बल्कि आपने जीवन कि तीन सिर्फ तीन काहानिया सुनाऊंगा. पहली कहानी जीवन कि अस्पस्ट सी लगती  घटनाओं का अर्थ बाद में  समझ पाने से सम्बन्ध है. मैंने पहले 6 मानिनो तक पढने के बाद भी रीड कॉलेज कि पढाई छोर दी. मै आपको ये बताना चाहूँगा कि मैंने एषा क्यों किया .यह कहानी मेरे पैदैस से भी पहले प्रारंभ है..
मुझे जन्म देने वाली  माँ  एक कॉलेज में पढ़ी  छात्रा   थी  और उसने यह तय कर राखी थी कि , कि कॉलेज में पढ़े लिखे किसी दम्पति को गोद दे देगी.. इसकी साडी तैयारी भी हो चुकी थी..

 par huaa aisha ki jab maine is duniya me ankhe kholi ,  mujhe god lene ke liye yaitaar dampati ne  antim palo me यह फैशाला किया कि ओ किसी  बालिका को हि गोद लेगी.तब पर्तीक्षा सूचि में  दुश्रे स्थान पर मेरे परसेंट माता पिता. को अधि रात को फ़ोन कर पूछा गया कि क्या आप एक बच्चे को गोद लेंगे.? उनका उतर था कि बिलकुल लेंगे. मेरी माँ को बाद में पत चला कि मेरी माता किसी कॉलेज में नहीं पढ़ी थी और मेरे पिता तो हाई स्कूल भी उतरीं नहीं थे.. इश पर मेरी माँ ने गोद देने के कागजात पर दस्खत करने से इनकार कर दिए, और कुछ  महीनो बाद ओ तभी राजी हुई.. कि मेरे माता पिता उसे बचन  दिए कि उसे कॉलेज जरुर भेजेंगे..१७ वर्षो बाद मै कॉलेज तो चला गया . पर मैंने आपनी नादानी में एक एषा कॉलेज चुन लिया , जो आपके स्टैनफोर्ड जैशा हि महंगा था . और मेरे वह के पढाई में मेरे कामगार माता पिता साडी पूंजी निकली जा रही थी. 6 महिना बाद ,मुझे इसमें कोई सार नजर नही आये. मै नहीं जनता था कि जीवन में मुझे क्या बनना है और मुझे यह भी समझ नहीं  आ रहा था कि किस तरह कॉलेज इसमें मेरी सहायता कर सकता है. इसलिए,जो होगा सब ठीक होगा , एषा मानते हुए. मैंने कॉलेज कि पढाई  को अलबिदा कह दिया , यह वक्त  तो यह खासा डरावना  लग रहा था ,पर पीछे देखने पर यह अब मेरे जीवन का सबसे बेहतरीन  फैश्लो में से एक  लगा करता है., जैसे हि मैंने कॉलेज चोर मेरा उस क्ष में जाने कि बाध्यता समाप्त हो गयी.;
जिनमे पढाये जाने वाले सब्जेक्ट  जिनमे मुझे तनिक भी दिलचस्पी नहीं थी., और उन कक्षों का द्वार पूरा खुल गे जिस में हमें रूचि थी.
 अब मै उस में पूरी रूचि ले सकता था.


यह saबसे  मजेदार यो नहीं थी. अब मुझे होस्टल का कमरा  भी  उपलब्धी न था. सो मै दोस्तों,के कमरे में फर्स पर सोया करता था.,कोक कि खली बोतल बेच कर खाने कि पेशा जुटाया करता था. और हर रविवार सात किलोमीटर पिडल चल कर श्री कृष्ण  मंदिर पहुचता , ताकि  सप्ताह में कम से कम एक बार अच्छा खाना मिल सके, या खा सकू.  किन्तु अपनी जिझ्याषा और अंतर कि प्रेरणा से मैंने यह जो कुछ किया . वः बाद में चल कर  मेरे लिए बहुत मुल्य्बान सीधी हुआ.





मै आपको इसकी एक मिसाल देना चाहूँगा- उन दिनों रीड कॉलेज सुंदर तथा कलात्मक हस्तलिपि के प्रिशिक्षण  के लिए संभवत;  अमेरिका का सर्वोतम केंद्र था ,चुकी मै अपनी समान्य कक्ष्ये छोर चूका था. अत: मैंने हस्तलिपी कि  क्ष ज्वाइन करने का फैश्ला किया  और वह हाँथ तथा  छपाई के सुंदर अक्षरों कि जिन बारीकियो से मेरा परिचय हुआ, वः; सब  मुझे अत्यंत अकर्सन लगा.उस वक्त मेरे जीवन में इनके किसी व्यवहारिक इस्तेमाल कि कोई सम्भावना न थी. मगर एक दशक बाद , जब हमने आपने मैक[ मकिन्तोश] कोउम्पुटर कि  desine में लगे  थे, अचानक ये सब मेरे काम आ गया और हमने उसमे तरह तरह के फौल्ट डाले., चुकी फिर विंडोस ने  बस यही चीज मैक से कॉपी कर ली, तो सम्भावना यही बनती है. यदि मैंने सुलेखन कि वे कक्षाए न कि होति ,तो आज किसी भी किस्म के पर्सनल कोउम्पुटर में वे उत्कृत नहीं होते व्. जो उनमे हुआ करते है.


आप जीवन कि अस्पस्ट सी लगती घटनाओं  के अर्थ  आगे देखते हुए नहीं बल्कि पीछे देखते हुए.  पीछे देख कर हि  हि समझ सकते है. यह आप यकीं कर सकते है. कि ये घटनाये किसी - न किसी  तरह  भविष्य में हि साफ़ हो सकेंगी. इसके लिए आपको किसी चीज में आस्था टिकाये हुए रहना होगा.. - उसे आप अत; प्रेरणा भक्तिव्यता, ज़िन्दगी या कर्म, चाहे जो भी कह ले . मेरे इस नजरिये से मुझे कभी धोखा नहीं हुआ और इसी से मेरे जीवन के सारे बदलाव मुमकिन हो सके. 
 मेरे जीवन के सारे  बदलाव  मुमकिन हो सके.
मेरी दूसरी खानी प्रेम और उसे खोने का  बिषय में है..
मै इस मामले में भाग्यशाली रहा कि मैंने जो करना चाहा, उसे जीवन में पा हि लिया. स्टीव  वाजनीएक और मैंने जब मेरे माता -पिता के गेरेज में एप्पल कि शुरुआत कि,तब मै बस 20 बरस का था. हमने कड़ी मेहनत कि  और १० वर्षो में हि एप्पल  हम दो जाने से बढ़ कर  दो अरब डोलर कि कंपनी में बदल गयी जिसमे 4000 कर्मचारी काम करते थे , एक वर्ष पह्ले हमने सबसे बेहतरीन उत्पाद ,मैकिन्टोश का श्रृजन किया था और मै अभी अभी 30 वर्षो का हुआ  था, तभी अचानक कमपनी ने हमें निकाल दिया .

मै  लगभग  निश्चित हु कि यदि मुझे एप्पल से  नहीं निकला गया होता , तो इनमे से कुछ भी न हुआ होता _ दावा कडवी तो लगी , पर मेरा अनुमान है कि मरीज को उसकी जरुरत थी. जीवन आपको कभी कभी चोट जरुर पहुचता है , पर आप आपनी आस्था न खोये. मुझे पूरा यकीं है कि जो एक चीज मुझे आगे बढाती रही , वह आपने काम से प्यार थी.
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एकऐसा कंपनी  जिसे आपने हि खरी कि हो,उससे आपको निकला कैसे जा सकता है? दरअसल में  हुआ एषा कि जब एप्पल का विकाश हुआ , तो हमने उस में एक व्यक्ति को भारती किया ,जिसके बारे  में मेरी धरना थी  कि ओ मेरे साथ मिल कर उसे भली बहती चला सके. कुछ दिनों तक ओ सब ठीक रहा  . मगर  फिर भविष्य को लेकर हमारा विज़न अलग होते गए. और अंतत: वह बिंदु आ गए . जब हमें अलग होना हि था. और जब हमने जोर देना अज्मैस कि तो कंपनी का मंडल उशी आदमी का साथ देना  मंजूर किया  और इस तरह , जिसमे मैंने आपनी साडी एनर्जी power laga di . usi se bahar kar diya gaya. 

mai tut saa gaya . kuch mahino tak mujhe samjh me nahi aaya ki mai kya karu. akhir mai karu kya . mai sabhi trah se bifal sabit ho chuka tha. aur maine silicon waili chor dene tak ke vishy me bhi soch liya tha., ha lekin mujhe deere deere  yah pratitr hone laga ki jo mai kar raha tha, usme mera pyaar ab bhi kayam hai. , mera pyar aapni jgah ab bhi kayam hai. so maine ekbaar fir se shuruaat karne ka faishla kiya ..

तब मै इसे नहीं समझ पाया ,पर बाद में मुझे महसूस हुआ कि एप्पल  से मुझे निकला जाना मेरे जीवन  सबसे सृजनात्मक  दौर  में प्रेबेश करने को उन्मुक्त कर दिया.   आगले पञ्च वर्षो के दौरान मैंने नेक्सस नमक , कंपनी और फिर पिक्सर नाम कि दूसरी कंपनी  शुरू कि  और एक ऐशी कमाल कि महिला से मोहब्बत कि  जो बाद में मेरी पत्नी बनी . पिक्सर ने फिर टॉय स्टोरी नमक विश्व कि पहली कंप्यूटर अनिमेटेड फीचर फिल्म बनाई  और वह अब विश्व कि सबसे सफल अनिमेतिओं स्टूडियो है . फिर कुछ अनोखा संयोग से फिर एप्पल ने नेच्क्सोस को खरीद लिया  , और मै पुन: एक बार एप्पल में आ गया ..नेक्सस में जो हमने टेक्नोलॉजी बिकसित कि थी , आज वही  एप्पल के नव कलेवर के केंद्र में स्थित है  और लोरिन    और मेरा एक बेहतरीन परिवार है.

 मै निश्चित हु  कि अगर मुझे एप्पल से निकला नहीं गया होता तो , ये इनमे से कुछ भी नहीं हुआ होता . दावा कडवी तो लगी , पर मेरा अनुमान है कि मरीज को उसकी जरुरत भी थी . जीवन कभी कभी आपनो को चोट जरुर पहुचता है. पर आपनीं  आस्था न खोये. मुझे पूरा यकीं जो एक चीज मुझे आगे बदाय .  वह आपने काम से प्यार थी .आप किस चीज से प्यार करते है .इसकी तलाश आपको हि करनी है. यह आपके काम के लिए जितना सच है, उतना आपके प्रिये व्यक्ति को लेकर  भी है. आपका काम आपके जीवन के एक बड़ा हिस्सा होने जा रहा है. और सच्ची संतुस्ती हासिल करने के लिए आपको वह करने कि जरुरत है. जिसके बारे में आपको यह यकीं हो कि यह एक महँ कार्य है. और एक महँ कार्य करने के एक तरीका यही है. जो आप करते है. उससे आपको प्यार हो. यदि आप अब तक उसे नहीं पा सके , तो उसकी तलाश में लगे. समझौता न करे . दिल से सम्बन्धी  चीजो के भांति  जब आप अपना प्रिये काम तलाश लेंगे , तब आप जान जायेंगे, और किसी भी महान रिश्ते  कि तरह साल दर साल , आपका वह काम बेहतर से बेहतरीन होता चला जायेगा.\





 मेरी तीसरी कहानी मौत के बिषय में?
मै जब 17 वर्ष का था  तब मै किसी  कि कही एक बात पढ़ी , जो कुछ इस तरह थी : ' यदि आप हर दिन इस बहती जिए जैसे वह आपका अंतिम दिन  है. तो एक दिन आप निश्चित रूप से  नसाही होंगे. इसक मुझ पर गहरा असर परा   तब से लेकर पिछले 33 वर्सो के  दौरान मै रोजाना सुबह  आइने के सामने जाकर खुद से पूछता रहा हु: यदि आज मेरे जीवन का अंतिम दिन हो. तो क्या मै वह करना चाहूँगा, जो मै करना चाहता हु , या जो मै करने जा रहा हु.? और जब भी कई दिनों तक इसक उतर न मिले , तब समझ लेना  कि मुझे कही से कुछ तब्दील करने कि जरुरत है.

यह याद रखना कि मै जल्दी मरने वाला हु .  मुझे मिला  एषा  सब्स्ज़े अहम् साधन  है, जिसने आपने जीवन में बड़े फैशाले करने  में मेरी मदद कि  है.क्यूंकि लगभग सभि चीजे -सभि उम्मीद , सभि  तरह  के दंभ , सर्मिंदगी  तथा  नाकामी के सरे भय, मृतु  के सामने बिलकुल नहीं टिकती. बस सिर्फ वही टिका रहता है, जो सचमुच अहम् होता है. यह आपके द्वारा  कुछ खो देने के भय  से बचने का मेरी जानकारी  में सबसे अच्छा उपाय है .आप तो पहले से  हि नग्न  है. इसलिए ऐशी कोई वजह नही हो सकती कि आप आपने ह्रदय का अनुसरण न करे.


लगभग एक वर्ष मुझे पहले पत चला कि मै  पैनक्रियाज के एक ऐसे कैंसर से पीड़ित हु. जो असाध्य है , और मै बस तीन से छह : महिना जीवित रहने का आशा कर सक्तु हु.  मेरे डॉक्टर ने मुझे बाय सलाह दी कि  , मै इस बीच साडी बंकि बकाया काम निपटा लू. .किन्तु फिर उसी din , आगे कि जाँच से यह पत चला कि  मेरा कैंसर उस अनोखे किस्म का है ..  जिसे ओप्रतिओं से ठीक किया जा सकता है  आखिर वह ओप्रतिओं हुआ , और मै स्वस्थ हु.


यह मेरा मौत से सबसे करीब सामना था . और आशा है , कुछ के दशक और मिल सके. रोज रोज मृतु  कि कल्पना को खुद के लिए लाभदायक पाने कि बजाये सचमुच उसके इतने करीब पहुच कर मै  अब और ज्यदा यकीं के साथ कह सकता हु ,,कि कोई भी मरना नहीं चाहता . यहाँ तक कि जो लोग स्वर्ग जाना चाहते है . वो भी वह पहुचने के लिए मरना नहीं चाहते. फिर भी मौत  मंजिल है . जहा हम सब को जाना है है.अब तक उस से कोई बच नहीसका .और  मौत को waisha हि होना चाहिए, क्यूंकि वह जीवन का सबसे  बड़ा आविष्कार है, संभवत: , जीवन में परिवर्तन का वह वाहक है., जो पुराने को हटा कर नए का रास्ता साफ किया करता है., आप अभी नए है, पर वह दिन बहुत दूर नहीं , जब आप पुराने पड़ते जायेंगे और अंतत; हटा दिए जायेंगे.
 aapka samay simit hai , ise kisi any ka jivan jeete huye  vyrth na gawaye. रुदियो ke फंदे में न पड़े.- जिसका अर्थ है  दुसरे व्यक्तियों कि सोच के नतीजे के साथ है, दुसरो के विचारो के शोर- शराबे में आपनी अअंतरात्मा कि  आवाजे को गम न होने दे . सबसे अहम् यह है कि आपने ह्रदय तथा अंतर कि प्रेरणा का अनुशरण करे या करने का सहस पैदा करे.. बंकि साडी चीजे गौण है.



थॉट्स ... हमेशा भूखे रहे और , हमेशा बुधु रहे..



( यह भासन 12 जून 2005 को स्टैनफोर्ड  univercity  के दिशांत समारोह में दिया गया था. यह लिखित न्हासन था)


दोस्तों, अगर आप सब को अच्छा लगा तो आप इसे शेयर जरुर करे..





Tuesday, 5 July 2016

FACEBOOK PAR KISI BHI LANGUAGE ME POST STATUS& COMMENT KAISE KARE ,

FACEBOOK PAR KISI BHI LANGUAGE ME













Facebook par kisi bhi bhasa me baat kaise kare. Aapne friends se unki  language me baat kaise kare, chating kaise kare , aapne dosto ke bhasa me hi unke post par comment kaised kare.,kisi bhi bhasha me status , commment , & posrt kaise kare.? Facebook par kisi bhi language ki post ko kaise padhe .. agar aapke man bhi kar raha hai ki mai in sabh swalo ka  javab mera pss bhi rahe , aagar aap bhi in sabhi swalo ka javav janna chahte hai , to aap jaan sakte hai., Aapko is post me aapke sabhi swalo ka javav mil jayega .. i maen  mai aap se baat kar raha hu  Facebook ke new feature ka , jo ye hai..Multilingual composer ki jo users ko aysi tool provide karta hai . jisse aap kisi bhi  bhasha me  post ko padh bhi sakte hai  ho , Aapni bhasha  ki post  likh kar  use other language me convert kar sakte ho.....

ye to aap bhi jante honge, ki duniya ke  sabse badi social networking site ne anounce kiya hai ki uske developers ne aysa multilingual composer banaya hai , jissse aap world ke  kisi bhi person se unki bhasha me baat kar sakte hai. Facebook ne haal hi mai ek aisha feature lunvh kiya  hai.....................................................................................................................................................




















 jiise  facebook ke sabhi user aapni posts, status and comments ko difference languages me badal kar duniya  bhar me apne friends se online chat kar sakta hai , isse aap messege me kisi bhi friend se unki  hi sound me baat kar sakte hai ........................................................................................................     Ab koi problems nahi hogi , kisi  other language wale insaan se baat karne me  . ab ham kisi bhi language wale insaan se baat kar sakte hai , kisi foren countary  wale insaan se ham baat kar sakte hai.....................



FACEBOOK PAR AAPNE FRIENDS SE KISI BHI BHASHA ME BAAT  KARE YA CHAT KARE>


iski help se user jo bhi post share karenge ya aapne friend ko messege send karenge to user ko alag alag languages me dikhegi..
i thinking  other users aapki post ko apni bhasha me dekh sakte hai  padh sakte hai.. facebook mne apne ek blog ki post me likha hai ki ''  ab aap log facebook par aapni jaankari ko ya thoughts ko diffrents language me share kar sakege  ya kar sakte hai., i mean ab aap aapne friends se uski bhasha me baat kar sakenge.................................





facebook blog me likha hai , ki hamari community  ke 50% user english ke alawa koi aur bhasha bolte hai..., jayada tar aisha hota hai , ki log ek dusre  ki language ko samjh nahi paate hai. us time bahut problems hoti jab mai aapne hi friends ka language nahi samjh ta hu tab yah problems hoti hai, aur yahi wajah hai ki kisi other language wale friends se ham achhi se baat nahi kar paate hai khul kar baat nahi kar paate hai. aur o bhi mujhse baat nahi kar paata hai, kyunki o bhi mera language achhi se nahi samjh ta hai . aur yahi wajah hai ki usse hamaari dosti din par din normals hoti jaati hai, aur ek din aisha hota hai, ki ham us  se baat karna hi  chor dete hai.. aaur aapne ek achhe khase friends ko bhul jaate hai..
ab aisha koi problems  nhi hopgi aapko facebook par baat karne me..
jyadatar log ek dushre se achha se baat nahi kar paate the, isliye facebook ne is probvlems ka solution bahut time se search kar raha tha , jisse ek dusre se chat karte samay ek dusre ko koi problems na ho., aur diffrents bhasha ka metter unke beech barier na baner.....




FACEBOOK PAR KISI BHI LANGUAGE ME POST < STATUS & COMMENTS KAISE KARE?


facebook ke anushar fihaal ye composer only desktop version me hai  ke liye avalible hai. but other log multiple  languagees post ko kisi bhi device me read kar sakte ho.. abhi aap sirf ise computer , laptom me hi use kar sakte hai, ha lekin aap android mobaile, ios,iphaid,iphone and other sabhi version me padh sakte ho...



Abhi facebook ne is feature ka  shuruaat ki , ye proper workl karega ya nahi , is pe facebook ne kuch nahi kaha ., fir bhi ye page par achhae se work kar raha hai...



multilingual composer aapke kisi bhi bhasha me likha huaa post alow krta hai . baad me aap dusri laguage me change kar sakte hai.. jisme aap aapni post ko publish karna chahte hai.\
example aap aapne post ko hindi me likh kar baad me aap use english me change kar sakte hai . ya translate kar sakte hai

let us , aapka ko friends chines  janata hai , to aapki post status ko ,o uski hi bhasha me padh sakta hai... ye composer  abhi facebook par use hone wali , abhi matra 45 language me hi work karta hai 
facebook ke is translater ka main chief ... FAZEEL AYAN hai..




Facebook me multingual compuser ke feature ko enable kaise kare.?



step1.

baat yah hai ki abhi ye feature sirf desktop version me hi hai.,  to mai yaha aapko desk to version ke baare me hi bata raha hu.
\
1. sabse pahle aap facebook ka desktop version open kare or setting me jaaye.


step2.

1. ab aap right me l;anguage  hai us pe click kare.
2. yaha par aap language setting me aapned hisab se setting kare.



jisse ki aap koun see bhasha jante hai , aur kis bhasha me aapni post ko translate karna chahte hai., language setting me iske alag alag , optin diya gaya hai .. aapko jo bhi language selkect karnbi hai aap yaha par kar sakte hai.


finaly mai aap ko ye suggestion dunga ki facebook ka wonderfulfeature hai jo, real me user ke liye bahut kaam aayega or bahut si problems ko solve kar degha..
agr aapki frioend other country me hai to , aap us se uski bhasa me baat kar sakte hai.....
ye feature facebook ko aur hi famaous bana dega.



i hope,  hai ki aapko ye post achhi lagi .  to aap ise share kar ke aapne friends ko bhi bataye .. aapne dosto ka help kare.....  aap ise social site pe share jarur karev .... i like all persion.. bay dosto,  fir milte hai, agli post ke sath...

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