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Sunday, 19 June 2016

बॉलीवुड की हॉट एक्ट्रेसेज का विदेशी कनेक्शन


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बॉलीवुड की हॉट एक्ट्रेसेज का विदेशी कनेक्शन
कई विदेशी एक्ट्रेसेज ने बॉलीवुड में आकर लाखों दिलों की धड़कनों को बढ़ा दिया है। इनकी खूबसूरती से शायद आज कुछ टॉप एक्ट्रेसेज भी जेलस होती होंगी।



बॉलीवुड एक ऐसी इंडस्ट्री है जहां हर किसी को खुले दिल से अपना लिया जाता है। बॉलीवुड में ऐसे कई एक्ट्रेसेज हैं जो अपनी किस्मत आजमाने सात समंदर पार आई हैं। इन्हें इनकी काबिलयत के बदौलत इंडस्ट्री में सराहा गया है। चलिए डालते हैं एक नज़र इन बी-टाउन की हॉट एंड सेक्सी एक्ट्रेसेज पर जिनका हैं विदेशी कनेक्शन।

1. एमी जैक्सन

फोटो साभार: im.rediff.comforeign actresses who achieved fame in bollywood
‘एक दीवाना था’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने वाली ब्रिटिश मॉडल एमी जैक्सन ने अपनी बॉलीवुड में अपना सफ़र शुरू किया। बॉलीवुड में रोल नहीं मिलने के कारण वो साउथ के मूवी में नज़र आने लगी मगर अक्षय कुमार के साथ ‘सिंह इस ब्लिंग’ फिल्म की सफलता के बाद अब वो साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत के साथ एथिरण 2 में नज़र आने वाली हैं।

2. कैटरीना कैफ


foreign actresses who achieved fame in bollywood फोटो साभार: g.ahan.in
बॉलीवुड की चिकनी चमेली ‘ब्रिटिश मूल्य’ की हैं। बॉलीवुड में एंट्री लेने से पहले कैटरीना एक मॉडल के तौर पर काफी मशहूर थीं। उन्होंने बॉलीवुड में बूम फिल्म के साथ शुरुआत की। बॉक्स ऑफिस में इस फिल्म में खास कमाल नहीं किया। ‘नमस्ते लंदन’, और ‘मैंने प्यार क्यूं किया’ जैसी फिल्मों से कैटरीना को पॉपुलैरिटी हासिल हुई। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड के नहीं देखा। सलमान खान की गर्लफ्रेंड के टैग से कैटरीना को बुलाया जाने लगा लेकिन ‘राजनीती’  जैसी गंभीर फिल्म में अपनी दमदार एक्टिंग के चलते कैटरीना कैफ को बॉलीवुड में सराहा जाने लगा। आज वो बॉलीवुड की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस हैं। [इसे भी पढ़ें:  हॉट बॉलीवुड हीरोइन्स के बोल्ड फोटोशूट]

3. नर्गिस फाकरी


foreign actresses who achieved fame in bollywood फोटो साभार: filmibeat.com
‘अमेरिकन मूल’ की नर्गिस फाकरी ने अपना बॉलीवुड डेब्यू इम्तिआज़ अली और रणबीर कपूर स्टारर रॉकस्टार से की। उसके बाद उन्होने ‘मैं तेरा हीरो’, ‘किक’ (आइटम सोंग) और अब ‘हाउसफुल 3’ में अपने हुस्न और एक्टिंग की छाप छोड़ी हैं। हाल ही में उनका एक्टर उदय चोपड़ा के साथ ब्रेकअप हुआ हैं जिसके चलते वो इन दिनों अमेरिका में अपने फ्रेंड्स और फॅमिली के साथ समय बिता रही हैं। [इसे भी पढ़ें: बॉलीवुड अभिनेत्रियां जिन्हें लोग बिकनी में देखना ज्यादा पसंद करते हैं]

4. जैकलीन 



‘श्रीलंकन ब्यूटी’ जैकलीन फ़र्नांडिज़ का तो पूरा बॉलीवुड कायल हैं। साल 2006 में उन्होंने ‘अलादीन’ फिल्म से अपना डेब्यू किया था। वैसे इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर काफी ख़राब रिसपॉन्स मिला लेकिन जैकलीन फ़र्नांडिज़ की खूबसूरती और हॉट बॉडी को फिल्ममेकर्स ने काफी नोट किया। उन्होंने ‘हाउसफुल 2’, ‘किक’ और ‘मर्डर 2′ में अपने हुस्न के जलवे बिखरें। हाल ही में उनकी’ हाउसफुल 3′ रिलीज़ हुई जिसने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ का आकड़ा पार किया है। [इसे भी पढ़ें: जानें कौन हैं बॉलीवुड की मोस्ट डिजायरेबल एक्ट्रेस]

5. सनी लियॉनी

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फोटो साभार: sharestills.com
इंडो-कैनेडियन पोर्न स्टार सनी ने बॉलीवुड इंडस्ट्री का सफ़र काफी कम समय में तय किया हैं। सनी ने भी रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ में अपने हुस्न से लोगों को मदहोश कर दिया था। ‘एक पहेली लीला’, ‘रागिनी एम्एमएस  2’ जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग की छाप छोड़ने वाली सनी को भी बॉलीवुड इंडस्ट्री ने खुले दिल से अपना लिया हैं। नतीजन उन्होंने अपने पास्ट को अलविदा कर अब बॉलीवुड में अपने पैर जमा लिए हैं।

6. एल्ली अवराम

foreign actresses who achieved fame in bollywood फोटो साभार: talkingmoviez.com
स्वीडिश मॉडल रह चुकी  एल्ली अवराम ने ‘बिग बॉस 7’ में सलमान खान की फेवरेट के तौर पर काफी फेमस हो गयी। ‘मिक्की वायरस’ मूवी से बॉलीवुड में डेब्यू किया और अभी कुछ दिनों पहले कपिल शर्मा की मूवी ‘किस किस को प्यार करू’ में भी भी नज़र आई।

7. हेलन

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फोटो साभार: media2.intoday.in
बॉलीवुड में अपने डांस से सबका दिल जीतने वाली हेलन जब बॉलीवुड में आई तो उन्हें ख़ुशी ख़ुशी फिल्म इंडस्ट्री ने एक्स्सेप्ट कर लिया। एंग्लो-बर्मी वंशज हेलन को केबरेट की क्वीन कहा जाता हैं। हेलन, बॉलीवुड की ऐसी एक्ट्रेस थीं जिन्हें ‘आइटम गर्ल’ कहना गलत नहीं होगा।


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उम्र के साथ ये एक्ट्रेसेज हो गईं सुपरहॉट

 उम्र के साथ ये एक्ट्रेसेज हो गईं सुपरहॉट



फोटो साभार: filmibeat.com
फोटो साभार: filmibeat.com

उम्र के साथ ये एक्ट्रेसेज हो गईं सुपरहॉट

कहते हैं कि उम्र के खूबसूरती कम होती है लेकिन बॉलीवुड में कई ऐसे एक्ट्रेसेज हैं जो उम्र के साथ और हॉट होती गईं।


बॉलीवुड में ऐसी कई एक्ट्रेसेज हैं जो रियल ज़िन्दगी में डस्की हुआ करती थीं लेकिन इन्होंने कॉस्मेटिक सर्जरी और स्किन लाइटेंड ट्रीटमेंट की मदद से अपनी पर्सनालिटी को और बेहतरीन बना दिया है। समय के साथ साथ इन एक्ट्रेसेज की ओवरआल पर्सनालिटी में काफी बदलाव देखा गया है और आज ये सुपरहॉट होगई हैं।

1.शिल्पा शेट्टी


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फोटो साभार : outlookindia.com, moviewalo.com

शिल्पा शेट्टी ने हाल ही में अपना 41 वां बर्थडे सेलिब्रेट किया। शिल्पा ने बॉलीवुड में एंट्री लेने के बाद दो बार अपनी नोज सर्जरी करवाई है। जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म बाज़ीगर की तब उन्हें किसी से नोट नहीं किया था लेकिन आज शिल्पा के फिगर और चेहरे का हर कोई दीवाना हैं।

2.रेखा 


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फोटो साभार: filmibeat.com, bollywoodlife.com

भानु लेखा रेखा जब फिल्म इंडस्ट्री में आई तब वो मोटी और काफी सावली हुआ करती थी लेकिन आज रेखा की खूबसूरती का हर कोई दीवाना है। उन्हें देख कर कोई भी यह नहीं कहा सकता हैं कि आज वो अपने उम्र के 50 वे पड़ाव पर है। [इसे भी पढ़ें: बॉलीवुड की हॉट एक्ट्रेसेज का विदेशी कनेक्शन]

3.काजोल 


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फोटो साभार: i.ndtvimg.com,pinimg.com

काजोल अपने शुरूआती दिनों में कभी भी खूबसूरत नहीं दिखाई दी लेकिन जैसे जैसे वक़्त बीता काजोल की खूबसूरती में अलग ही रोनक देखने को मिली। काजोल ने हाल ही में स्किन लाइटेंड ट्रीटमेंट लिया है जिससे वो इन दिनों काफी खूबसूरती नज़र आ रही हैं।

4.बिपाशा बासु 


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फोटो साभार: filmibeat.com, bollywoodlife.com

बंगाली बॉम्बशेल बिपाशा बासु ने जब बॉलीवुड में एंट्री ली थी तब से लेकर आज तक उनकी पर्सनालिटी में एक अलग ट्रांसफॉर्मेशन देखने को मिला हैं। उम्र के साथ वो और निखरती गयी हैं। हाल ही में बिपाशा ने अपने बॉयफ्रेंड करण सिंह ग्रोवर से शादी की है जिसमे वो कमाल की लग रही हैं। [इसे भी पढ़ें: मिलिए बॉलीवुड की तलाकशुदा हीरोइनों से]

5.दीपिका पादुकोण


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फोटो साभार: hotbollywoodactress.ne, notjustrich.com

दीपिका ने बॉलीवुड में अपनी फिल्म ‘ओम शांति ओम’ से एंट्री ली थी तब से लेकर अब तक दीपिका में काफी बदलाव देखा गया हैं। दीपिका आज हर एक लड़की की रोल मॉडल हैं। स्टाइल और फैशन में दीपिका का कोई सानी नहीं हैं।

6.हेमा मालिनी


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फोटो साभार: wassupbollywood.com

बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल खूबसूरती की मिसाल हैं आज भी आप हेमा को देख कर यही हैं कि आप अपनी अपनी खूबसूरती को कैसे कायम रखती हैं।

7.प्रियंका चोपड़ा 


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फोटो साभार:topnews.in, dainikbhaskar.com

देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा बॉलीवुड के साथ हॉलीवुड में काफी पॉपुलर हैं। प्रियंका एक वाइन की तरह की तरह हैं जो धीरे धीरे अपना असर छोड़ती हैं।   प्रियंका चोपड़ा आज पुरे विश्व में एक स्टाइल आइकॉन बन चुकी हैं।

8. श्रीदेवी


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फोटो साभार: sridevikapoor.com,thereportertimes.com

अपने डार्क कॉम्प्लेक्शन के लिए जानी जाने वाली श्रीदेवी ने अपनी एक्टिंग के बलबूते पर सबका दिल जीत लिया था। श्रीदेवी भी उम्र के साथ काफी हॉट नज़र आने लगी हैं उन्हें देख कर नहीं लगता हैं की उनकी दो बेटियां हैं। [इसे भी पढ़ें: 

Thursday, 16 June 2016

ज़िंदगी को कीजिए ‘रीसेट’ – Press the Reset Button On Your Life

ज़िंदगी को कीजिए ‘रीसेट’ – Press the Reset Button On Your Life




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ज़िंदगी हमें हर समय किसी-न-किसी मोड़ पर उलझाती रहती है. हम अपने तयशुदा रास्ते से भटक जाते हैं और मंजिल आँखों से ओझल हो जाती है. ऐसे में मैं हमेशा से यही ख्वाहिश करता आया हूँ कि काश मेरे पास ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू करने के लिए कोई रीसेट बटन होता जैसा मोबाइल या कम्प्युटर में होता है, और ऐसा सोचनेवाला शायद मैं अकेला शख्स नहीं हूँ.
यकीनन, हमारे पास बीते समय में लौटने के लिए कोई टाइम मशीन नहीं है लेकिन कुछ तो ऐसा है जिससे हम अपने जीवन को रीसेट या रीबूट कर सकते हैं.
और ऐसा करने के लिए कोई खास दिन जैसे नया साल या जन्मदिन या और कोई किसी खास मौके की राह तकना वक़्त की बर्बादी ही होगी. आज यह पल ही वह सबसे बेहतर अवसर है जब हम अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक नयी शुरुआत कर सकते हैं.
हमारी मुख्य समस्या यह है कि हम अपने नए लक्ष्यों के बारे में सोचकर उत्साहित तो बहुत हो जाते हैं लेकिन उन्हें जीवन में उतारने का लिए ज़रूरी मेहनत नहीं करते. फिर कुछ समय बीतते-बीतते हमें यह अहसास हो जाता है कि हम कुछ भी हासिल नहीं कर पाए. हम कहाँ चूक कर बैठे?
ऐसे में हमें इस बात को मन में बिठाना चाहिए कि कुछ हासिल करने के लिए मेहनत करने और अनुशासित रहने से भी ज़रूरी यह है कि हम भली-भांति सोच-विचार कर अपने लक्ष्य बनाएं. यदि हम अपनी सामाजिक हैसियत बढ़ाने (जैसे ज्यादा पैसा कमाने या नया सामान खरीदने) के लिए लक्ष्य बना रहे हैं तो शायद हमारा हौसला जल्द ही पस्त पड़ जाएगा क्योंकि हम इसे पूरे दिल से नहीं बनाते क्योंकि ये वे बातें हैं जो हम दूसरों को प्रभावित करने के लिए करना चाहते हैं.
इसलिए सबसे पहला चरण यह है कि हम अपने दिल के भीतर टटोलें और उस चीज़ की पहचान करें जो हमारे लिए सबसे कीमती है. और फिर उसे पाने के लिए आगे बढ़ें. सोचें कम, करें ज्यादा.
अपनी ज़िंदगी को रीसेट करने के लिए आप इन सुझावों को भी अपना सकते हैं:
स्वास्थ्य:-
बेहतर स्वास्थ्य की ओर: आज और इसी वक़्त से अपने खानपान की आदतों में सुधार कीजिये. यदि आपने शाकाहारी बनने या वीगन डाईट अपनाने का तय किया है तो इसे अमल में लाइए. प्रोसेस्ड फ़ूड, जंक फ़ूड, चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैंडी वगैरह को अपने आहार से बाहर कीजिये.
मास्टर क्लींजिंग आजमाइए: दस दिनों की डिटॉक्सीफिकेशन डाईट से आपका स्वास्थ्य रीबूट होगा और आपके आहार में बदलाव आएगा. मैं ऐसा तीन बार कर चुका हूँ. इससे शरीर और मन के बीच तादात्म्य स्थापित होता है. जब हमारी ऊर्जा भोजन को पचाने में खर्च नहीं होती है तो हमारा शरीर स्वयं को व्यवस्थित करने लगता है. उपवास करके देखिये और आप जान जायेंगे कि हम अपने समय का कितना बड़ा हिस्सा खाना बनाने और खाने में लगा देते हैं.
सरल-सहज जीवन:-
जंजाल से छुटकारा: अपने आसपास फैले सामान और कबाड़ को उलटिए पलटिये और उनकी तीन ढेरियाँ बनाइये – रिसाइकल, दान, और उपयोग. जिन वस्तुओं को आपने बहुत समय से इस्तेमाल नहीं किया है उन्हें उनकी कंडीशन के अनुसार या तो फेंक दीजिये, या किसी को दे दीजिये, या बेच दीजिये. इसी तरह अपनी मेज की दराज, आलमारी, गैरेज, और शेल्फ की सफाई कीजिये.
अपने मन को विस्तार दें: हम बहुत सारा समय अपने माहौल को व्यवस्थित करने में लगाते हैं लेकिन अपने उस स्पेस की अनदेखी करते हैं जिसमें हमारा सबसे ज्यादा समय बीतता है, और वह है हमारा मन. अपने मन को रीबूट करने के लिए उन नकारात्मक विश्वासों से छुटकारा पाइए जो आपको कमजोर बनाते हैं. अपने मन से उन बातों को बाहर निकालिए जो आपको आगे नहीं ले जातीं. हद से ज्यादा दूसरों की परवाह मत कीजिये, अहंकार वश लिए गए अनावश्यक संकल्पों को पूरा करने में मत जुटें.
घर-परिवार-संबंध:-
जुड़ाव और मेलमिलाप रखिये: हमारी ज्यादातर महत्वाकांक्षाओं के केंद्र में हम ही होते हंन लेकिन इनके लिए हमें अपने संबंधों की अवहेलना नहीं करनी चाहिए. अपने परिवार और बच्चों के साथ बिताये गए लम्हे कभी व्यर्थ नहीं जाते. अपने माता-पिता से और अधिक जुड़ने का प्रयास कीजिये क्योंकि उन्हें हर बीतते दिन के साथ आपकी

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Friday, 10 June 2016

जनकल्याण को धरा पर आई गंगा












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जनकल्याण  को धरा पर आयी गंगा 

दो दिन बाद देश में गंगा दशहरा कि धूम होगी . ज्येष्ठ मॉस के शुक्लपक्ष कि दसमी को हर वर्ष गंगा दशहरा मनाया जाता है . पुरानो में वर्णित कथाक्रम  के अनुशार मन जाता है  कि इसी दिन धरती पर गंगा मैया का अवतरण हुआ था. ऋग्वेद  में कही -कही गंगा  का उल्लेख आया  है, लेकिन पुरानो में तो गंगा अवतरण कि कथा का बार रोमाचित है .
महाप्रतापी रजा सागर ने अस्व्मेध यझ संपन्न कर अस्व्मेध का घोर छोरने कि तैयारी कि. यह घोर चारो तरफ दूर दूर के राज्यों में घूम कर  यदि वापिस आपनी राजधानी आ जायेगा  और किसी द्वारा पाकर न जायेगा , तो मना जाता था  कि अस्व्मेध करने वाला रजा चकवर्ती सम्राट  कि उपाधि वाला हो गया. इसके बिपरीत यदि किसी रजा ने उस घोरे को पकर लिया ,तो इसे चुनौती मान कर उस घोरे के पीछे चल रहा सैन्य दल उस रजा से युद्ध करता था  .और उसे हरा कर घोरे को मुक्त कर आगे बढ़ता था . यदि सैन्य दल उस रजा को परस्त नहीं कर पाया तो , उस रजा को चक्रवर्ती बन पन संभव नहीं था .
जब राजा सगर  अस्व्मेध का घोर छोरने का साडी तैयारी पूरी कर चुके थे , उससे पहले रात्रि  में हि देवराज इंद्रा  ने राजा कि अस्व्शाला से घोरे को चुरा लिया . सगर  के प्रक्रम से इंद्रा डरा हुआ था  कि यदि वः चक्रवर्ती राजा बन गया , तो कही आगे चल कर कही वह स्वर्ग पर भी कब्ज़ा कर इन्द्रसान न छीन ले . इसलिए  अस्व्मेध में बाधा डालने के लिए  इंद्रा ने घोरा को चुरा लिया  और चुरा कर  दूर कपिल मुनि के अस्राम में घोरे को चुपके से बांध दिया . इधर सुबह घोर छोरने के लिए देखा तो घोर नदारत  . अफरातफरी मंच गया कि आखिर घोर कहा गया . घोरे कि खोज में सैन्य दल निकल पड़े  अलग अलग दिशाओ में .

उल्लेख आता है  कि सूर्य वंशी  राजा के 60 हजार पुत्र थे  ओ भी अलग दल बना कर पिता कि सम्मान के रक्षा के लिए निकल पड़े .घोरे कि खोज में .
खोजते खोजते धरती का छोर आ गया  और सामने देखा तो समुन्द्र कि अथाह जल  दूर दूर तक फैला था .आस पास खोजा तो उसने पाया कि  कोई ऋषि आपने अस्राम  में तपस्या कर रहा है .  और घोर वही बंधा है . सगर कि पुत्रो ने घोरे को पहचान लिया  और आपना क्रोध व्यक्त करने लगा .इसी क्रोध में एक पुत्र ने ऋषि को ललकारा  कि घोर चुरा कर  अब यहाँ ताप कर रहे हो.. इसी बीच ऋषि मुनि का ध्यान टुटा . और जैसे हि उन्होंने अखे खोली , आंखे से निकले तेज से सगर के 60 हजार पुत्र  भस्म हो गया .
इधर रजा सगर परेशां था कि सैन्य  तुक्रिया वापस लौट आज्यी , पर घोरे का कही पत न चला . घोरे कि खोज में 60 हजार पुत्र गए वापिस नहीं लायेते .
चिंतित रजा आपने पोत्र अंशुमन  से कि व्यथा कि पुत्रो कि खोज में जाने को कहा . दुन्ध्ते दुन्ध्ते  जब अंशुमन उसी अस्राम में पंहुचा तो  चारो तरफ  रख का डेढ़ देख कर चौक गया . उसने ऋषि को देख कर प्रणाम किया और आपनी चिंता बताई .ऋषि ने कहा मै कपिल मुनि हु  और ये जो रख के ढेर तुम देख रहे हो , ये रजा सगर कि पुत्रो कि भस्म है . कह कर ऋषि ने पूरा वृतांत अंशुमन को बता दिया . अंशुमन ने कहा कि ये सब अकाल मौत मरे है , इनकी मुक्ति कैसे होगी.. कपिल मुनि ने उपाय सुझाये कि स्वर्ग से  गंगा को लेन पर  हि उसके पवित्र स्पर्श से इनकी मुक्ति हो संभव है.Image result for गंगाऋषि ने बताया कि  विष्णु  के चरणों से निकली गंगा गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल में विराजमान है . ब्रह्मा कि स्तुति करने से हि वह प्रसन होकर गंगा को धरती पर भेजेंगे .अंशुमन ने खूब कठिन ताप किया . लेकिन ब्रह्मा जी प्रसन्न नहीं हुए . उनके बाद इसी साधना में अन्शुमकं के पुत्र राजा दिलीप ने भी आपने ताप से ब्रह्मा को प्रसन्न करने कि कोशिस कि . अंतत: पिता के बताये ताप को पूरा करने के लिए भागीरथ  ने बीरा उठाया . आखिर कार ब्रह्मा प्रसान हुए और वरदान मांगने को कहा  , तब राजा भागीरथ  ने आपने पुरखो के  मुक्ति को गंगा को धरती पर भेजने कि  कि प्राथना कि .ब्रह्मा के कहने पर  गंगा स्वर्ग चोर कर पृथ्वी लोक में आने को तैयार नहीं थी , तब  ब्रह्मा जी ने  गंगा को  लोककल्याण के लिए धरती पर अवतरित होने का अनुरोध किया.\
गंगा मन तो गयी , लेकिन स्वर्ग से  धरती पर उनके त्रिव बेग को संभालेगा कौन , तब ब्रह्मा के अनुरोध  से महादेव गंगा को आपनी जटाओ में गंगा को धारण करने के तैयार हुए. इस तरह गंगा सिवजी के जटाओ  से होति हुई धरती पर अवतरित हुई.रजा भागीरथ आगे आगे चलते रहे  और गंगा  उस मार्ग का अनुशरण करती हुई कपिल मुनि के अस्राम पहुची जहा उनके  पवित्र  जल का स्पर्श पाकर भागीरथ कि पुरखो कि मुक्ति हुई.

भागीरथ गंगा को धरती पर लाये इसलिए उन्हें भागीरथी भी कहे जाने लगा . सामने  समुन्द्र को देख कर  गंगा का विलय हुआ , वह भी एक माहन तीर्थ बन गया  गंगासागर , बंगाल कि खरी में यह गंगा और सागर कि संगम  हिन्दुओ का पुन्य तिथि है, जिसके महत्त्व को दर्शाते हुए लोकोक्ति बन गयी . सारे तीर्थ बार बार , गंगा सागर एक बार ' यानि कि जो पुन्य सरे तीर्थ को बार बार करने से मिलता है , वह गंगासागर में एक बार मिलता है. एक बार सनान करने से मिलता है.
यह गंगा सागर में एक बार स्नान करने से प्राप्त हो जाता है. गंगोत्री से गंगा सागर तक कि यह करीब 2500 किमी कि यात्रा गंगा कि पवित्रता , निर्मलता,अविरलता और प्रवहमानता के रूप में  अनादी काल से भारत कि संस्कृति का तो पोषक रही है.मनुष्य जीवन विशेषत: हिन्दुओ के लिए जीवन कि प्रेरणा मणि जाती है.गंगा जल जहा मुक्ति का प्रतिक मन जाता है , व्ही रोगनाशक  भी . वर्षो तक रखे रहने पर भी गंगाजल कि यह विशेषता है , कि वह प्रदूषित नहीं होता .

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Tuesday, 7 June 2016

Life is easy….ज़िन्दगी आसान है !

Life is easy….ज़िन्दगी आसान है !

 कुछ दिनों पहले मैं बस यूँ ही कुछ Ted Talks Youtube पर देख रहा था . Ted Talks में आप हर तरह के topics पर interesting talks देख सकते हैं . ऐसे ही देखते -देखते मेरी नज़र एक video पर पड़ी जिसका title था “Life is easy” , title interesting था , मैंने तुरंत उसे play कर दिया . और सचमुच ये एक बहुत ही inspiring talk थी . इसमें Thailand के एक simple से farmer, Jon Jandai की कहानी है, जिनका कहना है “Life is easy…why make it hard ? “, और  आज दुनिया भर से लोग उनसे सीखने आते हैं की लाइफ को आसान कैसे बनाया जाए . Friends, मैं उनकी इस talk से बहुत प्रभावित हूँ और इसीलिए मैं इसका text Hindi में translate कर के आप सबसे share कर रहा हूँ . I hope, मेरी तरह आप भी यहाँ से ज़रूर कुछ सीख पाएंगे .

Life is easy….ज़िन्दगी आसान है !

एक बात है जो अब मैं लोगों से हमेशा कहना चाहता हूँ . वो बात है ” life is easy …ज़िन्दगी आसान है” . ये इतनी आसान और मजेदार है … पर पहले मैं ऐसा नहीं सोचता था .
जब मैं बैंकाक में था, मैं सोचता था life कितनी hard है … कितनी complicated है .
Life is easy...why make it hard!
Life is easy…why make it hard!
मैं northeast Thailand के एक छोटे से गाँव में पैदा हुआ था . और जब मैं छोटा था, सब कुछ बहुत मजेदार और आसान था, पर जब TV आया, बहुत से लोग गाँव आये और कहने लगे, ” तुम लोग गरीब हो, तुम्हे life में success पानी चाहिए . तुम्हे success पाने के लिए Bangkok जाना चाहिए .
 तब मुझे बुरा लगा, मैं खुद को गरीब लगने लगा . इसलिए मैं बैंकाक चला गया .
मैंने बहुत मेहनत की, कम से कम हर रोज आठ घंटे, पर मैं जो खा पाता था वो बस एक बाउल noodle या fried rice या इसी तरह का कुछ और .
और जहाँ मैं रहता वो बहुत गन्दी जगह थी, एक छोटा सा room जिसमे बहुत से लोग सोते थे। । वहां बहुत गर्मी थी …
मैं खुद से बहुत सवाल करने लगा … जब मैं इतना hard work करता हूँ तो मेरी लाइफ इतनी हार्ड क्यों है ? कुछ तो गड़बड़ है, क्योंकि मैं इतनी चीजें produce करता हूँ, पर मुझे पर्याप्त नहीं मिलता … और मैंने और जानने की कोशिश की . मैंने university में पढ़ने की कोशिश की .
University में कुछ learn करना बहुत कठिन है, क्योंकि ये बहुत बोरिंग है .
और मैं university में पढ़ाये जाने वाले subjects की तरफ देखने लगा ; हर एक faculty, उनमे से ज्यादातर destructive knowledge रखते हैं . university में मेरे लिए कोई productive knowledge नहीं था . जब मैं किसी चीज की तरफ देखता हूँ, जैसे की आप architecture की पढ़ाई कर रहे हैं, इसका मतलब आप और अधिक बर्बादी करेंगे . जितना अधिक ये लोग काम करेंगे उतना अधिक पहाड़ destroy किये जाएंगे . और चाओ प्रया बेसिन की अच्छी ज़मीन और भी अधिक कंक्रीट से ढँक दी जायेगी . हम बहुत डिस्ट्रोय करते हैं .
अगर हम agriculture या इस जैसा कुछ सीखते हैं तो इसका मतलब कैसे ज़मीन को, पानी को ज़हरीला बनाना है, toxicate करना है,कैसे सब कुछ तबाह कर देना है … ये सीखते हैं …. मैं feel करता हूँ कि हम जो कुछ भी करते हैं वो कितना complicated है, कितना कठिन है. और हम हर चीज को कठिन बना देते हैं …
Life is so hard… ज़िन्दगी कितनी कठिन है … मैं हताश हो जाता .
मैंने सोचना शुरू किया, आखिर मुझे यहाँ बैंकाक में क्यों रहना है ? मैंने सोचा – जब मैं छोटा था, कोई भी आठ घंटे काम नहीं करता था, हर कोई दो घंटे काम करता था, वो भी बस साल के दो महीने, एक महीना चावल बोन के लिए और दूसरा महीना फसल काटने के लिए . बाकि free time रहता था, 10 महीना free time. इसीलिए Thailand में लोग इतने अधिक त्यौहार मनाते थे, हर महीने कोई न कोई त्यौहार . क्योंकि उनके पास इतना free time होता था ….Uh
और दिन के समय, हर कोई झपकी भी लेता था . अभी भी Laos में, अगर कोई Laos जा सके तो जाये, वहां lunch के बाद लोग झपकी लेते हैं . और उठने के बाद वे बस गप्पे लड़ाते हैं, तुम्हारा दामाद कैसा है, तुम्हारी wife कैसे है, बहु कैसी है . लोगों के पास बहुत समय है, और चूँकि उनके पास बहुत time है, उनके पास खुद के लिए भी time है .
और क्योंकि उनके पास खुद के लिए time है, उनके पास खुद को समझने का टाइम है . और जब वे खुद को समझ जाते हैं, वो देख पाते हैं कि उन्हें life में क्या चाहिए . इसलिए लोग – बहुत से लोग देख पाते हैं कि उन्हें ख़ुशी चाहिए, उन्हें प्यार चाहिए, वे अपनी life एन्जॉय करना चाहते हैं .
इसलिए लोग अपनी life में ढेर सारी beauty देखते हैं, और उसे कई तरह से express करते हैं . कुछ लोग अपने चाकू का handle बड़े खूबसूरत तरीके से carve करके, कुछ बड़े अच्छे से टोकरी की बुनाई करके . लेकिन अब कोई ऐसा नहीं करता है . कोई इस तरह का कुछ नहीं करता है . हर जगह लोग plastic use करते हैं .
इसलिए मुझे लगा यहाँ कुछ गड़बड़ है, मैं इस तरह का जीवन नहीं जी सकता . इसलिए, मैंने university छोड़ने का निश्चय किया, और गाँव वापस चला गया .
जब मैं घर गया तब मैं वैसे रहने लगा जैसे बचपन में रहता था . मैं साल में बस दो महीने काम करने लगा . मुझे चार टन चावल मिल जाते . और पूरा परिवार, 6 लोग, पूरे साल आधा टन से कम ही खाते . इसलिए हम कुछ चावल बेच देते .
फिर मैंने दो तालाब बनाये, fish ponds, हमारे पास साल भर मछलियाँ खाने को होती हैं . और हमने एक छोटा सा garden बनाया … आधे acre से भी काम . और मैं रोज़ बस 15 मिनट उस garden के रख -रखाव में लगाता हूँ . मेरे पास 30 से अधिक तरह की सब्जिया हैं . 6 लोग सारी सब्जियां नहीं खा सकते, हमारे पास market में बेचने के लिए surplus रहता है . हम वहां से भी कुछ income generate कर लेते हैं .
इसलिए मुझे लगता है, ये आसान है, मुझे सात साल बैंकाक में रहने की क्या ज़रुरत थी, इतना मेहनत करने पर भी जहाँ खाने के लिए पर्याप्त नहीं मिलता था, लेकिन यहाँ सिर्फ साल में दो महीने और रोज 15 मिनट देकर मैं 6 लोगों का पेट पाल सकता हूँ .. ये आसान है .
और उसके बाद — पहले मैं सोचता था कि मेरी तरह के बेवकूफ लोग जिन्हे स्कूल में अच्छी grades नहीं मिलती, उनके पास अपना मकान नहीं हो सकता . क्योंकि मुझसे बुद्धिमान लोग, जो हर साल class में first आते हैं, उन्हें भी एक अच्छी नौकरी मिलने के बावजूद अपना मकान करने में 30 साल लग जाते हैं . लेकिन मेरे लिए जो university की पढ़ाई नहीं कर पाया, मेरा मकान कैसे हो सकता है ? मेरे जैसे कम पढ़े -लिखे लोगों के लिए कोई उम्मीद नहीं है .
लेकिन फिर मैंने earthly buildings बनाना शुरू किया ; ये इतना आसान है . मैं रोज दो घंटे देता, सुबह 5 से 7, और तीन महीने में एक घर तैयार .
Jon Jandai Houseऔर एक दूसरा दोस्त जो class में सबसे तेज था, उसे भी घर बनाने में तीन महीने लगे, लेकिन उसे कर्ज में रहना पड़ेगा …. उसे अगले तीस साल तक कर्ज चुकाना होगा . तो उसके comparison में मेरे पास उन्तीस साल दस महीने का free time है . Yeah, इसलिए मुझे लगता है life कितनी आसान है .
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस तरह से घर बना पाउँगा . और अब मैं हर साल घर बनाता जा रहा हूँ, कम से कम साल में एक घर, अब मेरे पास पैसे नहीं हैं पर मेरे पास बहुत सारे घर हैं .
मेरी प्रॉब्लम है कि आज रात मैं किस घर में सोने जाऊं . 🙂
तो, घर कोई दिक्कत नहीं है, कोई भी घर बना सकता है . 13 साल के स्कूल जाने वाले बच्चे एक साथ ईंटे बनाते हैं …घर बनाते हैं . एक महीने बाद उनकी library तैयार . बच्चे घर बना सकते हैं, एक बूढी nun अपने लिए एक घर बना सकती है . बहुत से लोग घर बना सकते हैं . तो, ये आसान है .
अगर यकीन न हो तो जिसे घर चाहिए वो खुद try करके देख ले …
और अगली चीज है कपडे .
मैं गरीब फील करता था, मुझे लगता था मैं handsome नहीं हूँ . मैंने किसी और की तरह लगने का प्रयास किया।  एक movie star की तरह ताकि मैं अच्छा दिख सकूँ, बेहतर लग सकूँ .
मैंने एक jeans खरीदने के लिए एक महीने तक पैसे बचाये . जब मैंने उसे पहना तो मैं दाएं -बाएं घूम कर शीशे में देखने लगा . हर बार मैं देखता, पर मैं वही रहता … दुनिया की सबसे महंगी पैंट भी मुझे नहीं बदल सकती . मुझे लगा, मैं कितना पागल हूँ, मुझे इसे खरीदने की क्या ज़रुरत थी … एक महीना jeans खरीदने में लगा दिया . वो मुझे नहीं बदल सकी ..
मैं इस बारे में और सोचने लगा . हमें fashion follow करने की क्या ज़रुरत है . क्योंकि अगर हम उसे follow करते हैं तो हम कभी उसे catch नहीं कर सकते, क्योंकि हम तो follow करते हैं …इसलिए follow मत करो ।बस यहीं stay करो . जो है वो use करो …
तबसे बीस साल हो गए, मैं कभी कपडे नहीं खरीदता . मेरे पास जितने भी कपडे हैं वो औरों द्वारा छोड़े गए कपडे हैं . जब लोग मुझसे मिलने आते हैं वे बहुत से कपडे छोड़ के चले जाते हैं, उन्होंने वहां बहुत से कपडे छोड़े हुए हैं . तो अब मेरे पास टनों कपडे हैं .
और जब लोग मुझे बहुत पुराने कपडे पहने हुए देखते हैं, तो वे मुझे और कपडे दे देते हैं . अब मेरी समस्या है की मुझे अक्सर दुसरे लोगों को कपडे देने पड़ते हैं .
तो, ये आसान है .
और जब मैंने कपडे खरीदने छोड़ दिए , मुझे लगता है , ये सिर्फ कपड़ों के लिए नहीं है , ये मेरी life में और भी चीजों के बारे में है , मैंने ये जाना कि मैं जब कुछ खरीदता हूँ , तो इसलिए क्योंकि वो मुझे अच्छी लगती है या इसलिए कि मुझे उसकी ज़रुरत है .
तो अगर मैं इसलिए कुछ खरीदता हूँ क्योंकि वो मुझे अच्छी लगती है तो मैं गलत हूँ . जब मैं ऐसे सोचने लगा तो खुद को और free महसूस करने लगा .
और अंतिम चीज है , अगर मैं बीमार पड़ता हूँ तो मैं क्या करूँगा ?
शुरू में  मुझे सचमुच चिंता हुई कि मेरे पास पैसे नहीं हैं तो मैं क्या करूँगा . पर मैं और विचार करने लगा . आमतौर पर बीमारी एक आम बात है ,ये कोई बुरी बात नहीं है . बीमारी एक ऐसी चीज है जो हमें याद दिलाती है कि हमने अपनी लाइफ में कुछ गलत किया है इसलिए हम बीमार पड़े हैं .
इसलिए , जब मैं बीमार पड़ता हूँ , तो मुझे रुक कर अपने पास वापस आना होता है . और सोचना होता है कि मैंने क्या गलत किया .
तो मैंने सीखा कि पानी से कैसे खुद का उपचार किया जाए , कैसे मिटटी से खुद को ठीक किया जाए , मैंने खुद को ठीक करने के लिए बुनियादी बातें सीखीं.
तो अब जब मैं चार बेसिक चीजों के लिए खुद पर rely करता हूँ , मुझे लगता है ये कितना आसान है … मुझे आज़ाद होने जैसा कुछ feel होता है , जैसे …उह… मैं free feel करता हूँ . मैं महसूस करता हूँ कि मैं किसी चीज की ज्यादा चिंता नहीं करता , मुझमे डर कम है , मैं जो चाहूँ इस life में कर सकता हूँ .
पहले मेरे अंदर बहुत डर था , मैं कुछ नहीं कर सकता था . पर अब मैं बहुत free feel करता हूँ , मुझे लगता है मैं इस दुनिया में unique हूँ , मेरे जैसा कोई नहीं , मुझे खुद को किसी और की तरह बनाने की ज़रुरत नहीं है . मैं number 1 हूँ .
ऐसे मैंने इसे आसान बनाया , इतना हल्का …और उसके बाद , मैं सोचने लगा कि जब मैं बैंकाक में था , मुझे जीवन में कितना अंधकार नज़र आता था , मैंने सोचा कि उस समय मेरी तरह और भी कई लोग ऐसा ही सोचते होंगे .
इसलिए , हमने Ching Mai में “Pun Pun” नाम के एक जगह की शुरुआत की . इसका main aim है बीज बचाना . बीज collect करना , क्योंकि seed food है , और food life है अगर seed नहीं है तो life नहीं है . seed नहीं है तो freedom नहीं है , seed नहीं है तो happiness नहीं है . क्योंकि सीड नहीं है तो आपकी life किसी और पर निर्भर है ; क्योंकि खुद आपके पास खाने को नहीं है .
 इसलिए , seed save करना बहुत ज़रूरी है . इसलिए हम सीड सेव करने पर फोकस करते हैं . Pun Pun में यही main काम है .
और दूसरी चीज है कि ये एक learning center है-
हम खुद सीखने के लिए एक center चाहते थे , जहाँ सीख सकें कि ज़िन्दगी को आसान कैसे बनाया जाए . क्योंकि हमें हमेशा life को complicated और hard बनाना सिखाया गया है . हम इसे आसान कैसे बना सकते हैं ? ये आसान है , पर अब हम बिलकुल भी नहीं जानते कि इसे आसान कैसे बनाया जाए . क्योंकि – क्योंकि हम हमेशा इसे complicated बनाते हैं , और अब हम सीखना शुरू कर रहे हैं , और साथ रहना शुरू कर रहे हैं .
हर जगह हमें खुद को हर चीज से अलग करना सिखाया जाता है , independent होना सिखाया जाता है , ताकि हम सिर्फ पैसों पर निर्भर रह सकें . हमें एक दुसरे पर rely करने की कोई ज़रुरत नहीं हो . लेकिन अब , खुश रहने के लिए हमें  वापस आना होगा , दुबारा खुद से connect होना होगा , औरों से connect  होना होगा , हमें अपने mind  और body को वापस जोड़ना होगा .
हम खुश रह सकते हैं . Life is easy … ज़िन्दगी आसान है . और शुरू से अब तक मैंने यही सीखा है कि चार basic ज़रूरतें : रोटी , कपड़ा , मकान और दवाइयाँ हर किसी के लिए सस्ती होनी चाहिएं , यही सभ्यता है . लेकिन अगर आप इन चार चीजों को बहुत से लोगों के लिए कठिन बहुत कठिन बना देते हैं तो ये असभ्यता है . अब जब हम अपने चारों तरफ देखते हैं , हर चीज को पाना कितना कठिन है . इसलिए मुझे लगता है कि ये मानवजाति का पृथ्वी पर सबसे असभ्य युग है .
हमारे पास इतने लोग हैं जो University से पढ़ाई करके निकलते हैं , दुनिया में इतनी सारी universities हैं , दुनिया में  इतने चतुर लोग हैं . लेकिन , हमारी life कठिन और कठिन होती जा रही है . हम इसे किसके लिए कठिन बना रहे हैं ? हम अभी किसके लिए इतनी मेहनत कर रहे हैं ?
मुझे लगता है। । ओह! … ये गलत है , ये normal नहीं है . इसलिए , मैं बस normal बनना  चाहता हूँ . एक साधारण  आदमी , जानवरों के बराबर . चिड़िया अपना घोसला एक-दो दिन में बना लेती हैं . चूहा रात भर में अपना बिल बना लेता है . लेकिन , हमारे जैसे बुद्धिमान लोग अपना घर करने में तीस साल लगा देते हैं , और कई लोग तो यकीन ही नहीं कर पाते कि इस life में उनका अपना मकान हो सकता है . ये गलत है .
हम अपनी आत्मा का नाश क्यों कर देते हैं , क्यों – क्यों हम अपनी क्षमता इतनी नष्ट कर लेते हैं ? मुझे लगता है कि अब हद्द हो चुकी है कि normal life को abnormal तरीके से जिया जाए . लेकिन , लोग मुझे एब्नार्मल person की तरह देखते हैं . पागल आदमी . मैं इसकी चिंता नहीं करता , क्योंकि ये मेरी गलती नहीं है . ये उनकी गलती है , क्योंकि वे ऐसा सोचते हैं .
अब मेरी life आसान और हलकी है . यही मेरे लिए पर्याप्त है .
लोग जो सोचना चाहते हैं सोच सकते हैं . मैं अपने से बाहर की कोई चीज manage नहीं कर सकता . जो मैं कर सकता हूँ वो है अपना mind change करना , अपना माइंड manage करना . अब मेरा mind light और easy है ,यही काफी है .
अगर कोई अपनी life में choice चाहता है तो उसके पास चॉइस है . Easy होने की choice और hard होने की choice, ये आप पर depend करता है आप क्या चुनते हैं .
Thank You

Monday, 6 June 2016

कार्यक्षमता : Efficiency

कार्यक्षमता : Efficiency


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एक नवयुवक और कुछ बुजुर्ग लकड़हारे जंगल में पेड़ काट रहे थे. युवक बहुत मेहनती था. वह बिना रुके लगातार काम कर रहा था. बाकी लकड़हारे कुछ देर काम करने के बाद थोड़ी देर सुस्ताते और बात करते थे. यह देखकर युवक को लगता था कि वे समय की बर्बादी कर रहे हैं.Image result for efficiency
जैसे-जैसे दिन बीतता गया, युवक ने यह देखा कि बाकी लकड़हारे उसकी तुलना में अधिक पेड़ काट पा रहे थे जबकि वे बीच-बीच में काम रोक भी देते थे. यह देखकर युवक ने और अधिक तेजी से काम करना शुरु कर दिया, लेकिन वह अभी भी दूसरों की तुलना में कम ही लकड़ी काट पा रहा था.
अगले दिन उम्रवार लकड़हारों ने युवक को काम के बीच में अपने पास चाय पीने के लिए बुलाया. युवक ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि इससे समय व्यर्थ होगा.
एक बूढ़े लकड़हारे ने लड़के से मुस्कुराते हुए कहा, “तुम लंबे समय से अपनी कुल्हाड़ी में धार किए बिना लकड़ी काटने की कोशिश कर रहे हो और तुम्हारी सारी मेहनत बेकार जा रही है. कुछ समय के बाद तुम्हारी सारी शक्ति चुक जाएगी और तुम्हें काम बंद करना पड़ेगा.”
युवक को यह अहसास हुआ कि आराम करने के दौरान बाकी लकड़हारे चाय पीने और गपशप करने का साथ-साथ अपनी कुल्हाड़ियों पर भी धार करते थे. वे वाकई अकलमंद थे. उनकी कुल्हाड़ियां लकड़ी तो बेहतर काट पा रही थीं.
बूढ़े लकड़हारे ने युवक को हिदायत देते हुए कहा, “हमें अपनी बुद्धि का प्रयोग करके अपने कौशल और क्षमता को बढ़ाते रहना चाहिए. तभी हमें अपनी पसंद के दूसरे कार्यों को करने के लिए समय मिल पाएगा.
पर्याप्त विश्राम के बिना कोई भी अपना काम कुशलतापूर्वक नहीं कर सकता. कुछ समय के लिए काम को रोककर आराम करने से शक्ति का संचार होता है और अन्य किसी दृष्टिकोण से अपने कार्य का आकलन करके रणनीति बनाने का अवसर मिलता है.
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A young man and some old folks were chopping down trees in a jungle. The young man was very hard working. He always continued to work through his break. He was disappointed to see the older folks having to break a few times a day to drink and chat. He thought they were wasting their time.
Over the days that passed, the young man noticed that the older folks were chopping even more trees than he did even though they had breaks. He decided to work harder but the results were still the same – the older folks were more productive in their work.
One day, one of the old folks invited him for a drink during their break. The young man refused thinking it was a waste of time.
The old man smiled and told him, “You were wasting your effort chopping trees without re-sharpening your knife. It’s a matter of time before you give up ‘cause you’ll be so tired spending too much energy.”
Suddenly the young man realized that during the break times, the older folks while drinking and chatting, were also re-sharpening their knives at the same time! They were smart. They could chop faster than him.
The old man smiled and advised the young man, “What we need is efficiency by making use of our skill and ability intelligently. Only then can we have more time to do other things.”
How can one perform efficiently without sufficient rest? By taking a break, it is not to stop work but to rest and re-think our strategy to go about it from another angle, perhaps smarter. Think smart, work smart and rest smart.Image result for efficiency

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