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Thursday, 16 June 2016

Narcissus – नरगिस की कहानी

Narcissus – नरगिस की कहानी

cornelia kopp
अल्केमिस्ट ने वह किताब पढ़ने के लिए उठाई जिसे कारवां में कोई अपने साथ लाया था. पन्ने पलटने पर उसे किताब में नारसिसस की कहानी दिखी.
अलकेमिस्ट को नारसिसस की कहानी के बारे में पता था. नारसिसस एक युवक था जिसने किसी झील के किनारे बैठकर पानी में अपना अक्स देखा. अपने अप्रतिम रूप को देखकर वह खुद पर इतना मोहित हो गया कि सुध-बुध खो बैठा और झील में गिरकर डूब गया (एक दूसरी कहानी यह कहती है कि वह खुद को देखकर सब कुछ भूल गया और वहीं बैठे-बैठे उसने भूख-प्यास से दम तोड़ दिया).
कहते हैं कि जिस जगह वो गिरा था वहां एक सुंदर फूल उगा, जिसे हम नरगिस के नाम से जानते हैं.
लेकिन उस किताब में नारसिसस की इस कहानी के अलावा और कुछ भी बयां किया गया था. उसमें लिखा था कि नारसिसस की मौत के बाद उस वन की देवियां उस झील तक आईं, और उन्होंने देखा कि झील का मीठा पानी खारा हो चुका था.
“तुम क्यों रो रही हो?”, वनदेवियों ने झील से पूछा.
“ये आंसू नारसिसस के लिए हैं”, झील ने कहा.
“हम जानते हैं कि नारसिसस के गुज़र जाने का तुम्हें सबसे ज्यादा दुख है” उन्होंने कहा, “क्योंकि हमने उसे हमेशा दूर से ही देखा जबकि तुमने उसकी सुंदरता को करीब से जी भर के निहारा”.
“लेकिन… क्या वो बहुत सुंदर था?”, झील ने पूछा.
“तुमसे बेहतर इस बात को कौन जान सकता है?”, वनदेवियों ने अचरज से कहा, “तुम्हारे किनारे पर बैठकर ही तो वह पानी में अपनी छवि को निहारता रहता था!”
यह सुनकर झील कुछ पल को चुप रही, फिर वह बोली:
“मैं नारसिसस के लिए रोती रही लेकिन मुझे यह पता न था कि वह सुंदर था. मेरे रोने की वज़ह कुछ और थी. जब वह मेरे किनारों पर बैठकर मुझे देखता था तो मुझे उसकी आंखों में अपनी खूबसूरती नज़र आती थी.”
“कितनी सुंदर है यह कहानी”, अल्केमिस्ट ने खुद से कहा.

The Alchemist picked up a book that someone in the caravan had brought. Leafing through the pages, he found a story about Narcissus.
The Alchemist knew the legend of Narcissus, a youth who daily knelt beside a lake to contemplate his own beauty. He was so fascinated by himself that, one morning, he fell into the lake and drowned.
At the spot where he fell, a flower was born, which was called the narcissus.
But this was not how the author of the book ended the story. He said that when Narcissus died, the Goddesses of the Forest appeared and found the lake, which had been fresh water, transformed into a lake of salty tears.
“Why do you weep?” the Goddesses asked.
“I weep for Narcissus,” the lake replied.
“Ah, it is no surprise that you weep for Narcissus,” they said, “for though we always pursued him in the forest, you alone could contemplate his beauty close at hand.”
“But….. was Narcissus beautiful?” the lake asked.
“Who better than you to know that?” the Goddesses said in wonder, “After all, it was by your banks that he knelt each day to contemplate himself!”
The lake was silent for some time. Finally it said:
“I weep for Narcissus, but I never noticed that Narcissus was beautiful. I weep because, each time he knelt beside my banks, I could see, in the depths of his eyes, my own beauty reflected.”
“What a lovely story,” the Alchemist thought.
(From the blog of Paulo Coelho)

ज़िंदगी को कीजिए ‘रीसेट’ – Press the Reset Button On Your Life

ज़िंदगी को कीजिए ‘रीसेट’ – Press the Reset Button On Your Life




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ज़िंदगी हमें हर समय किसी-न-किसी मोड़ पर उलझाती रहती है. हम अपने तयशुदा रास्ते से भटक जाते हैं और मंजिल आँखों से ओझल हो जाती है. ऐसे में मैं हमेशा से यही ख्वाहिश करता आया हूँ कि काश मेरे पास ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू करने के लिए कोई रीसेट बटन होता जैसा मोबाइल या कम्प्युटर में होता है, और ऐसा सोचनेवाला शायद मैं अकेला शख्स नहीं हूँ.
यकीनन, हमारे पास बीते समय में लौटने के लिए कोई टाइम मशीन नहीं है लेकिन कुछ तो ऐसा है जिससे हम अपने जीवन को रीसेट या रीबूट कर सकते हैं.
और ऐसा करने के लिए कोई खास दिन जैसे नया साल या जन्मदिन या और कोई किसी खास मौके की राह तकना वक़्त की बर्बादी ही होगी. आज यह पल ही वह सबसे बेहतर अवसर है जब हम अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक नयी शुरुआत कर सकते हैं.
हमारी मुख्य समस्या यह है कि हम अपने नए लक्ष्यों के बारे में सोचकर उत्साहित तो बहुत हो जाते हैं लेकिन उन्हें जीवन में उतारने का लिए ज़रूरी मेहनत नहीं करते. फिर कुछ समय बीतते-बीतते हमें यह अहसास हो जाता है कि हम कुछ भी हासिल नहीं कर पाए. हम कहाँ चूक कर बैठे?
ऐसे में हमें इस बात को मन में बिठाना चाहिए कि कुछ हासिल करने के लिए मेहनत करने और अनुशासित रहने से भी ज़रूरी यह है कि हम भली-भांति सोच-विचार कर अपने लक्ष्य बनाएं. यदि हम अपनी सामाजिक हैसियत बढ़ाने (जैसे ज्यादा पैसा कमाने या नया सामान खरीदने) के लिए लक्ष्य बना रहे हैं तो शायद हमारा हौसला जल्द ही पस्त पड़ जाएगा क्योंकि हम इसे पूरे दिल से नहीं बनाते क्योंकि ये वे बातें हैं जो हम दूसरों को प्रभावित करने के लिए करना चाहते हैं.
इसलिए सबसे पहला चरण यह है कि हम अपने दिल के भीतर टटोलें और उस चीज़ की पहचान करें जो हमारे लिए सबसे कीमती है. और फिर उसे पाने के लिए आगे बढ़ें. सोचें कम, करें ज्यादा.
अपनी ज़िंदगी को रीसेट करने के लिए आप इन सुझावों को भी अपना सकते हैं:
स्वास्थ्य:-
बेहतर स्वास्थ्य की ओर: आज और इसी वक़्त से अपने खानपान की आदतों में सुधार कीजिये. यदि आपने शाकाहारी बनने या वीगन डाईट अपनाने का तय किया है तो इसे अमल में लाइए. प्रोसेस्ड फ़ूड, जंक फ़ूड, चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैंडी वगैरह को अपने आहार से बाहर कीजिये.
मास्टर क्लींजिंग आजमाइए: दस दिनों की डिटॉक्सीफिकेशन डाईट से आपका स्वास्थ्य रीबूट होगा और आपके आहार में बदलाव आएगा. मैं ऐसा तीन बार कर चुका हूँ. इससे शरीर और मन के बीच तादात्म्य स्थापित होता है. जब हमारी ऊर्जा भोजन को पचाने में खर्च नहीं होती है तो हमारा शरीर स्वयं को व्यवस्थित करने लगता है. उपवास करके देखिये और आप जान जायेंगे कि हम अपने समय का कितना बड़ा हिस्सा खाना बनाने और खाने में लगा देते हैं.
सरल-सहज जीवन:-
जंजाल से छुटकारा: अपने आसपास फैले सामान और कबाड़ को उलटिए पलटिये और उनकी तीन ढेरियाँ बनाइये – रिसाइकल, दान, और उपयोग. जिन वस्तुओं को आपने बहुत समय से इस्तेमाल नहीं किया है उन्हें उनकी कंडीशन के अनुसार या तो फेंक दीजिये, या किसी को दे दीजिये, या बेच दीजिये. इसी तरह अपनी मेज की दराज, आलमारी, गैरेज, और शेल्फ की सफाई कीजिये.
अपने मन को विस्तार दें: हम बहुत सारा समय अपने माहौल को व्यवस्थित करने में लगाते हैं लेकिन अपने उस स्पेस की अनदेखी करते हैं जिसमें हमारा सबसे ज्यादा समय बीतता है, और वह है हमारा मन. अपने मन को रीबूट करने के लिए उन नकारात्मक विश्वासों से छुटकारा पाइए जो आपको कमजोर बनाते हैं. अपने मन से उन बातों को बाहर निकालिए जो आपको आगे नहीं ले जातीं. हद से ज्यादा दूसरों की परवाह मत कीजिये, अहंकार वश लिए गए अनावश्यक संकल्पों को पूरा करने में मत जुटें.
घर-परिवार-संबंध:-
जुड़ाव और मेलमिलाप रखिये: हमारी ज्यादातर महत्वाकांक्षाओं के केंद्र में हम ही होते हंन लेकिन इनके लिए हमें अपने संबंधों की अवहेलना नहीं करनी चाहिए. अपने परिवार और बच्चों के साथ बिताये गए लम्हे कभी व्यर्थ नहीं जाते. अपने माता-पिता से और अधिक जुड़ने का प्रयास कीजिये क्योंकि उन्हें हर बीतते दिन के साथ आपकी

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Saturday, 11 June 2016

बदलाव से कभी नहीं डरता सफल इनसान

बदलाव से कभी नहीं डरता सफल इनसान 















#सफलता  किसी को भी  अनायास नही मिलती है. गुण,कड़ी  म्हणत , सही समय और भाग्य के सही योग से सफलता मिलती है . अगर कोई  सोचता है कि बिन कुछ किये वह सिर्फ भाग्य के भरोसे सफल हो जायेगा , या हो सकता है , तो उसकी गलत फ्म्ही है. किसी भी और किसी कि भी  सफलता में भाग्य का रोल बहुत छोटा सा है. भाग्य आपना रोल तब निभा सकता है, जब व्यक्ति शेष सभि रोल  को अच्छी तरह से निभा  रहा होता है . अक्सर देखा गया है कि सफल  लोगो में कई आदते समान होति है. इन्हें आप सफलता के गुण और आपने कैरिएर- मंत के रूप में जाने .








  1. सकरात्मक सोच 
बिन सकरात्मक सोच के सफलता नही मिलती है. आपका अच्छा समय चल रहा हो या ख़राब , दोनों हि परिस्थिति में सकरात्मक सोचने कि जरुरत है. किसी ने कहा  है कि जब हमारा  ख़राब समय चल रहा होता है , तब हमारे मन में  मुताबिक चीजे नहीं होति है . उस समय यह सोचना चाहिए कि साडी चीजे ऊपर वाले कि मर्जी से  हो रहा है . और ऊपर वाला कभी किसी का बुरा नहीं चाहता है .
इससे ख़राब समय में भी सकरात्मक सोच को विकसित करे .कितने ख़राब समय आ जाये फिर भी आप आपने अंदर सकरात्मक सोच बिकसित करे .
आप जो भी काम करे , यह सोच कर करे कि उसमे सफल होंगे .  इससे से आप उत्साहित रहेंगे . आपो दुःख; में भी हमेशा खुस नजर आयेंगे .
आप जो भी काम करे :यह सोच कर करे कि उसमे सफल होंगे . इससे आप उत्साहित रहेंगे . अगर आप खुद पर विश्वाश नही करेंगे तो आप सफल नहीं होंगे .
आप आपने आप पे खुद से ज्यादा भरोषा करे.

  1. पहले हि लक्ष्य तय कर लेना 
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कुछ  पाने से पहले हि आपको लक्ष्य कि निर्धारित करना होगा .
इसके बाद आपको समय तय करना  करना होगा . इसके बाद आपको  आपना एक समय तय करना होगा , जिसमे आपको आपना लक्ष्य को पा लेना है . समय तय करने से  लक्ष्य आपके लिए एक चुनौती  कि तरह होगी . लक्ष्य हि सफल होने कि प्रेरणा देती है , लक्ष्य हि सफल होने कि प्रेरणा देती है . क्यूंकि उसे पाने के लिए आप म्हणत करते है . 
समय निर्धारित करने से आप बहुत मेहनत करते है .
आप उस में आपना 100 फिसिद देने कि कोशिस करते हो , आप आपना 100 फिशिद देने कि कोशिस करते है .
असफल व्यक्ति सफल होना तो चाहता है , लेकिन लक्ष्य को तय करने से डरता है . क्यूंकि कोशिश करने से पहले  हि  असफल होने का दर उसके मन में बैठ जाता है , जो उसे आगे बढ़ने से रोक देता है .

  1. सकरात्मक सोच से आता है , बड़ा बदलाव हमेशा शिखते रहना  ऑलवेज स्टे Image result for सकरात्मक सोच
काश आप ये जान जाते. सफल व्यक्ति हर दिन शिखता है . वह हर दिन कुछ न कुछ शिखता है .बड़ो ने कहा  है कि शिखने के लिए सिर्फ स्कुल  जाने कि जरूरत नहीं है. बड़ो ने कहा है कि शिखने के लिए सिर्फ स्कूल जाने कि जरूरत नहीं है .मनुष्य आपने काम के दौरान भी सीखते है .
आप आपने काम के प्रति जितने उत्साहित होंगे आप  उतना हि शिखेंगे . शिखने लके लिए मन में उत्साह  और आपना काम पसंद होना जरुरि है .अगर काम पसंद नही होगा तो  आप उसमे आगे बढ़ने कि कोशिस नहीं करेंगे.असफल व्यक्ति यथास्थिति  भाल रखने कि कोशिश करता है. नया चीजे शिखने से डरता है . उसे हमेशा लगता है है कि कुछ नया सिखने पर काम का बोझ  बाद जायेगा . आपनी  टीम में दुश्रो को भी वह नया व्हीजे शिखने से हतोत्त्श्हित  करता है . काम के दौरान  नयी चीजे सिखने के लिए हमेशा आउट ऑफ  बॉक्स सोचने कि जरुरत होति है.

  1. बोलने  कि कला में माहिर Image result for सकरात्मक सोच
सफल; होने के लिए आप में अत्म्बिश्वास बहुत जरुरि है .इसके साथ हि आपको एक इफेक्टिव कम्युनिकेटर [बोलने कि कला ] होना भी जरुरि है .
आपका आत्म्बिश्वास  दुसरो को आपकी तरफ आकर्षित करेगा . आपकी कम्युनिकेशन स्किल  उन्हें आपकी बातो को सुन्ने के लिए मजबूर करेगा .इफेक्टिव क्म्युन्केशन स्किल आपको pepole persen बना देगा . बोलने कि कला में माहिर  व्यक्ति एक बड़े समूह को आपने साथ करने में सक्षम है .


  1. मेहनत से जी न चुराना 
बुजुर्गो ने कहा कि मेहनत  कभी बेकार नहीं जाता है . इसलिए सफल होना है, तो मेहनत से भागने से परहेज करना होगा .जिन पर काम कि धुन सवार  होता है, वह समय कि प्रवाह नहीं करता है .अपनी छोटी छोटी खुशियों कि कुर्वानी देने से भी नहीं डरते है , पीछे नहीं हट्टे है . ऐसे लोगो को पत होता है  कि आज कि म्हणत हि कल उन्हें सुकून देगी . असफल लोग हमेश म्हणत से जी चुराते है . काम कम करते है . और दुश्रो को भी एषा करने के लिए  उन्हें उकसाते है .अगर दुश्रे उन से आगे निकल जाते है, तो उनसे  जलते भी है.

  1. जोखिम उठाने से नहीं डरना Image result for सकरात्मक सोच
  2. आपके दोस्त नहीं चाहते कि आप सफल हो
कहा जाता है  कि सफल लोगो ने सबसे  अच्छे फैश्ले उस समय लिए , जब उन्होंने रिस्क लिया , जब तक आप रिस्क नहीं लेंगे , तब तक आप उसके परिणाम से परिचित नहीं होंगे . तैराकी के वर्ल्ड चैंपियन  है  आस्ट्रेलिया  के फेल्प्स . अगर वह डूबने कि दर से तैरना हि न शिखते , तो आज वर्ल्ड चैंपियन नहीं बनते .  आगरा आप असफल  होते है, फिर भी भी आप कुछ शिखते है .आपने अगले प्रयाश  में आप उन गलतियों को नहीं करेंगे .एक बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि आदमी आपनी गलतिय से हमेशा शिखता है . इसलिए जोखिम उठाने से कभी नहीं डरना चाहिए ,क्यूंकि डर के आगे जीत है .

  1. बात कम , काम ज्यादा पागलपन [madness]
अगर आप आपना लक्ष्य  तय कर लेते है. कागज पर स्टेImage result for सकरात्मक सोचप -बाई-स्टेप उस तक कैसे पहुचना है ,का खाका भी खीच लेते है, तब क्या होगा ? आपका लक्ष्य आप से दूर होता चला जायेगा . एक बात हमेशा ध्यान में रखना चाहिए  कि लक्ष्य को पाने कि बात करना बहुत आसान होता है , लेकिन उसे पाने के लिए व्यवस्थित  रूप से आगे बढ़ना बहुत कठिन होता है. इसलिए सही मायेने सफल होने के लिए  बात करने से ज्यादा काम करने कि जरुरत  होति है.

  1. हर कदम का विश्लेषण Image result for सकरात्मक सोच
सफल व्यक्ति कोई भी फैश्ला लेने से पहले दोनों पहलुओ को परखते है . अगर आपको सफल होना है , तो आपको आपना हर कदम उठाने से पहले उसके हर पहलु के बारे में बिचार करना होगा .अगर आप आपने हर कदम  उठाने से पहले उसके हर पहलु को बारे में बिचार करे  , या करना होगा .अगर आप आपने हर कदम से पहले विश्लेषण  करेंगे, तो गलती कि गुंजाईश कम रहेंगी . इस तरह क एलोगो कि सफलता का प्रतिशत बहुत  ज्यादा होता hai . इसलिए  जरुरि है  कि अपने हर कदम कि आप खुद समीक्षा करे और उसके मुताबिक सुधaर भी करे.

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Saturday, 4 June 2016

सफलता का सबक ? lessons of success

सफलता का सबक
Safal kaise bane सफलता का सबक एक आठ साल का लड़का गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा जी के पास गाँव घूमने आया। एक दिन वो बड़ा खुश था, उछलते-कूदते वो दादाजी के पास पहुंचा और बड़े गर्व से बोला, ” जब मैं बड़ा होऊंगा तब मैं बहुत सफल आसमी बनूँगा। क्या आप मुझे सफल होने के कुछ टिप्स दे सकते हैं?”
दादा जी ने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया, और बिना कुछ कहे लड़के का हाथ पकड़ा और उसे करीब की पौधशाला में ले गए।
वहां जाकर दादा जी ने दो छोटे-छोटे पौधे खरीदे और घर वापस आ गए।
वापस लौट कर उन्होंने एक पौधा घर के बाहर लगा दिया और एक पौधा गमले में लगा कर घर के अन्दर रख दिया।
“क्या लगता है तुम्हे, इन दोनों पौधों में से भविष्य में कौन सा पौधा अधिक सफल होगा?”, दादा जी ने लड़के से पूछा।
लड़का कुछ क्षणों तक सोचता रहा और फिर बोला, ” घर के अन्दर वाला पौधा ज्यादा सफल होगा क्योंकि वो हर एक खतरे से सुरक्षित है जबकि बाहर वाले पौधे को तेज धूप, आंधी-पानी, और जानवरों से भी खतरा है…”
दादाजी बोले, ” चलो देखते हैं आगे क्या होता है !”, और वह अखबार उठा कर पढने लगे।
कुछ दिन बाद छुट्टियाँ ख़तम हो गयीं और वो लड़का वापस शहर चला गया।
इस बीच दादाजी दोनों पौधों पर बराबर ध्यान देते रहे और समय बीतता गया। ३-४ साल बाद एक बार फिर वो अपने पेरेंट्स के साथ गाँव घूमने आया और अपने दादा जी को देखते ही बोला, “दादा जी, पिछली बार मैं आपसे successful होने के कुछ टिप्स मांगे थे पर आपने तो कुछ बताया ही नहीं…पर इस बार आपको ज़रूर कुछ बताना होगा।”
दादा जी मुस्कुराये और लडके को उस जगह ले गए जहाँ उन्होंने गमले में पौधा लगाया था।
अब वह पौधा एक खूबसूरत पेड़ में बदल चुका था।
लड़का बोला, ” देखा दादाजी मैंने कहा था न कि ये वाला पौधा ज्यादा सफल होगा…”
“अरे, पहले बाहर वाले पौधे का हाल भी तो देख लो…”, और ये कहते हुए दादाजी लड़के को बाहर ले गए.
बाहर एक विशाल वृक्ष गर्व से खड़ा था! उसकी शाखाएं दूर तक फैलीं थीं और उसकी छाँव में खड़े राहगीर आराम से बातें कर रहे थे।
“अब बताओ कौन सा पौधा ज्यादा सफल हुआ?”, दादा जी ने पूछा।
“…ब..ब…बाहर वाला!….लेकिन ये कैसे संभव है, बाहर तो उसे न जाने कितने खतरों का सामना करना पड़ा होगा….फिर भी…”, लड़का आश्चर्य से बोला।
दादा जी मुस्कुराए और बोले, “हाँ, लेकिन challenges face करने के अपने rewards भी तो हैं, बाहर वाले पेड़ के पास आज़ादी थी कि वो अपनी जड़े जितनी चाहे उतनी फैला ले, आपनी शाखाओं से आसमान को छू ले…बेटे, इस बात को याद रखो और तुम जो भी करोगे उसमे सफल होगे- अगर तुम जीवन भर safe option choose करते हो तो तुम कभी भी उतना नहीं grow कर पाओगे जितनी तुम्हारी क्षमता है, लेकिन अगर तुम तमाम खतरों के बावजूद इस दुनिया का सामना करने के लिए तैयार रहते हो तो तुम्हारे लिए कोई भी लक्ष्य हासिल करना असम्भव नहीं है!
लड़के ने लम्बी सांस ली और उस विशाल वृक्ष की तरफ देखने लगा…वो दादा जी की बात समझ चुका था, आज उसे सफलता का एक बहुत बड़ा सबक मिल चुका था!
दोस्तों, भगवान् ने हमें एकmeaningful life जीने के लिए बनाया है। But unfortunately, अधिकतर लोग डर-डर के जीते हैं और कभी भी अपने full potential को realize नही कर पाते। इस बेकार के डर को पीछे छोडिये…ज़िन्दगी जीने का असली मज़ा तभी है जब आप वो सब कुछ कर पाएं जो सब कुछ आप कर सकते हैं…वरना दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ तो कोई भी कर लेता है…
इसलिए हर समय play it safe के चक्कर में मत पड़े रहिये…जोखिम उठाइए… risk लीजिये और उस विशाल वृक्ष की तरह अपनी life को large बनाइये!



सफलता के लिए सबसे ज़रूरी 12 सबक

सफलता के लिए सबसे ज़रूरी 12 सबक

vincent van gogh hindi quote

यह लेख Forbes मैगज़ीन के कॉंट्रीब्यूटर ट्रेविस ब्रैडबरी के आर्टिकल 12 Lessons You Learn Or Regret Forever का अनुवाद है जो उनकी लिखित अनुमति से यहां पोस्ट किया जा रहा है.

अपने पैरों पर खड़ा होना और कैरियर की राह पर बढ़ना कोई मामूली बात नहीं है. तुम चाहे कैरियर बदल रहे हो या यूनीवर्सिटी वापस अटैंड कर रहे हो या अपने 8 से दस घंटे के जॉब को छोड़कर बिजनेस की शुरुआत कर रहे हो, ये सब बहुत हिम्मत का काम है.
लेकिन सिर्फ़ हौसला ही तुमको बहुत आगे नहीं ले जा सकता. हिम्मत जुटाने के बाद जब तुम अगली स्टेप पर छलांग मारते हो तो अपने रास्ते का बमुश्किल 5% रास्ता ही तय कर चुके होते हो. अभी तुम्हारी मंज़िल कोसों दूर है और अपने सबसे खौफ़नाक डरों से तुम्हारा सामना होना बाकी है. ये डर वे हैं जो तुम्हें पहला कदम उठाने से बहुत देर तक रोकते रहे.
मैं यह मानकर चल रहा हूं कि तुम मेरी तरह हो और तुम्हारे पास कोई शानदार मेंटर नहीं है या तुम्हारे कंधे पर संपन्न पिता का हाथ नहीं है जो तुम्हें मार्ग दिखाए और अपने कैरियर को संभालने के लिए हर ज़रूरी साधन उपलब्ध कराए.
मैं तुम्हें अपनी बातें बताता हूं. लगभग बीस साल पहले मैं किसी बॉस के नीचे काम किया करता था. एक सर्फ़िंगबोर्ड शॉप में काम करने के बाद मैंने अपनी राह चुनी और एक पार्टनर के साथ अपनी कंपनी TalentSmart तब शुरु की जब मैं ग्रेजुएट भी नहीं हुआ था.
जब मैंने अपने पैरों पर खड़ा होने की राह चुनी तब मेरे दिल में अपने कैरियर को एक घुमाव देने की जबरदस्त चाह और रिस्क लेने की काबिलियत थी. उन दिनों मुझे यही लगता था कि सफल होने के लिए इन चीज़ों की सबसे ज्यादा ज़रूरत थी.
लेकिन यह सच नहीं था. मुझे भी गाइडेंस की ज़रूरत थी. इसके बिना आगे पढ़ने पर मुझे कई बहुत मुश्किल और कड़वे सबक सीखने को मिले. आज जब मैं इन बातों के बारे में सोचता हूं तो यह महसूस करता हूं कि ये सभी हमारे लिए बहुत बड़े रिमाइंडर्स हैं.

1. आत्मविश्वास सबसे पहली ज़रूरत है

सफल लोगों में एक अलग ही आत्मविश्वास झलकता है – ज़ाहिर है कि वे खुद में और जो कुछ भी वे करते हैं उसमें यकीन करते हैं. यह आत्मविश्वास उनमें सफल होने के बाद नहीं आया. यह उनमें पहले से ही था.
इस बारे में सोचो:
क. संदेह से संदेह उपजता है. दूसरे लोग तुमपर, तुम्हारे विचारों पर, या तुम्हारी काबिलियत पर यकीन क्यों करेंगे जब तुम्हें खुद ही उनपर यकीन नहीं होगा?
ख. नए चैलेंज उठाने के लिए आत्मविश्वास चाहिए. भयभीत या खुद को असुरक्षित महसूस करनेवाले लोग अपने कम्फ़र्ट ज़ोन में रहने के आदी होते हैं. इन कम्फ़र्ट ज़ोन्स से छुटकारा अपने आप कभी भी नहीं होता. यही कारण है कि जिन लोगों में आत्मविश्वास नहीं होता वे बंद गलियों सरीखी नौकरियों में फंस जाते हैं और सारे महत्वपूर्ण अवसरों को करीब से गुज़र जाने देते हैं.
ग. आत्मविश्वासहीन व्यक्ति बाहरी परिस्तिथियो के गुलाम बनकर रह जाते हैं. सफल लोग अपनी राह में आनेवाली कठिनाइयों से विचलित नहीं होते, यही कारण है कि वे हर मुकाम पर आगे बढ़ते जाते हैं.
आत्मविश्वास सफल कैरियर को बनाने वाला सबसे ज़रूरी बिल्डिंग ब्लॉक है, और आत्मविश्वास को संजोने पर तुम उन जगहों पर पहुंच सकते हो जिनकी संभावनाओं के बारे में तुमने कभी सोचा भी न होगा. कोई और नहीं बल्कि यह खुद तुम ही हो जो अपनी महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने से खुद को रोक रहे हो. यही वह समय है जब तुम्हें खुद पर संदेह करना बंद कर देना चाहिए.

2. तुम वह ज़िंदगी जी रहे हैं जो तुमने खुद बनाई है

तुम परिस्तिथियों के शिकार नहीं हो. कोई भी तुम्हें तुम्हारी वैल्यूज़ और महत्वाकांक्षाओं के विरुद्ध जाकर निर्णय लेने और कार्रवाई करने पर मजबूर नहीं कर सकता. आज तुम जिन परिस्तिथियों में जी रहे हो वे तुमने खुद ही पैदा की हैं. इसी तरह तुम्हारा भविष्य भी पूरी तरह तुम पर ही निर्भर करता है. यदि तुम खुद को कहीं फंसा हुआ पाते हो तो ऐसा बहुत हद तक इसलिए है कि तुम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए ज़रूरी रिस्क नहीं उठा पा रहे हो.
जब ऐक्शन लेने का वक्त करीब आ जाए तब यह याद रखना कि उस सीढ़ी के निचले पायदान पर होना बेहतर है जिसे आप चढ़ना चाहते हो न कि उस सीढ़ी के ऊपरी पायदान पर होना जिसपर से तुम कूद जाना चाहते हो.

3. बिज़ी होने का मतलब यह नहीं कि तुम प्रोडक्टिव भी हो

अपने आसपास मौजूद लोगों को देखो. वे सभी कितने बिज़ी होते हैं – मीटिंग-दर-मीटिंग भागते रहते हैं और दसियों ई-मेल्स भेजते रहते हैं. लेकिन क्या उनमें से ज्यादातर लोग वाकई बहुत प्रोडक्टिव काम कर रहे हैं, क्या वे वाकई ऊंचे लेवल्स पर सफलता पा रहे हैं?
सफलता भागमभाग और कुछ-न-कुछ करते रहने से नहीं आती. यह फ़ोकस से आती है. सफलता यह सुनिश्चित करने से आती है कि तुमने अपने समय का उपयोग कितनी कुशलता पूर्वक और कितना प्रोडक्टिवली किया. तुम्हें भी काम करने के लिए उतने ही घंटे मिलते हैं जितने औरों के पास हैं. अपने समय का बेहतर उपयोग करो. तुम्हारी मेहनत को तुम्हारी कोशिशों से नहीं बल्कि रिज़ल्ट से आंका जाएगा. अपनी कोशिशों को मौजूदा काम पर केंद्रित रखो और बेहतर परिणाम पाओ.

4. तुम उतने ही अच्छे हो सकते हैं जिनके साथ तुम जुड़े हो

तुम्हें उन व्यक्तियों के साथ संबंधित होना चाहिए जो तुम्हें प्रेरित करें, और जो दिल से तुमको बेहतर होते हुए देखना चाहते हों. शायद तुम भी ऐसा ही करते हो. लेकिन उन लोगों के बारे में क्या जो तुम्हें पीछे धकेल देते हैं? ऐसे लोगों को तुमने अपनी ज़िंदगी का हिस्सा क्यों बनाया हुआ है? तुम्हें कमतरी का, बेचैनी का, और नाउम्मीदी का अहसास कराने वाले लोग तुम्हारा कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं और शायद तुम्हें भी उनके जैसा ही बना रहे हैं. ज़िंदगी इतनी बड़ी नहीं है कि तुम ऐसे लोगों के विचारों का बोझ ढोते फिरे. उनसे अपना नाता तोड़ लो.

5. दिल “नहीं” कहता हो तो “हां” मत कहो

विश्व की टॉप यूनीवर्सिटी (University of California in San Francisco) में हुई रिसर्च में यह पता चला है कि जिन लोगों को “नहीं” कहने में बहुत मुश्किल होती है उन्हें तनाव, निष्क्रियता, और डिप्रेशन से जूझना पड़ सकता है, और ये सारी बातें कैरियर को ग्रोथ देने में बहुत बड़ी बाधा हैं. “नहीं” कहना बहुत से लोगों के लिए बहुत बड़ा चैलेंज है. “नहीं” बहुत शक्तिशाली शब्द है और आपको इस शब्द का उपयोग करने से झिझकना नहीं चाहिए. जब “नहीं” कहने का वक्त करीब आ जाए तो आप गोलगोल बातें जैसे “मुझे नहीं लगता कि मैं…” या “मैं इस बारे में सुनिश्चित नहीं हूं.” कोई नया कमिटमेंट करने के दौरान “नहीं” कह सकने की हिम्मत से आपको मौजूदा कमिटमेंट्स को पूरा करने में मदद मिलती है और यह बात आपको सफलता के करीब पहुंचने के बेहतर मौके उपलब्ध कराती है.

6. खुद से निगेटिव बातें करना बंद करो

जब तुम अपने कैरियर को नई दिशा दो रहे होगे तो तुम्हें चीयरलीड करनेवाला शायद कोई नहीं होगा. ऐसे में खुद पर कई तरह के संदेह होने लगते हैं. तुम्हारे निगेटिव विचारों को तुमसे ही ताकत मिलती है. तुम उनपर जितना फ़ोकस करेंगे वे उतने ही प्रबल होते जाएंगे. तुम्हारे ज्यादातर निगेटिव विचार सिर्फ़ विचार ही हैं, वे फैक्ट्स नहीं है. जब तुम्हें अपने निगेटिव विचारों और निराशाजनक बातों पर यकीन होने लगते तो एक काम करो – तुम उन्हें कहीं लिख लो. तुम जो कुछ भी कर रहे हो उसे वहीं रोक दो और विचारों को लिख लो. इस तरह तुम्हारे निराशाजनक विचारों की रफ़्तार पर विराम लगेगा और तुम चीजों को उनके वास्तविक रूप में ज्यादा तार्किक होकर देख पाओगे और वस्तुस्थिति को बेहतर समझ पाओगे.

7. खुद से “यदि ऐसा हो गया तो?” पूछना बंद कर दो

“यदि ऐसा हो गया तो?” ऐसा हाइपोथेटिकल स्टेटमेंट है जो तुम्हारी चिंता और तनाव को भड़काता है, और इस तरह यह तुम्हारी प्रगति की राह में बाधक है. चीजों को बिगड़ना हो तो उसके सैंकड़ों रास्ते हो सकते हैं, और तुम उनके बिगड़ने की संभावनाओं के बारे में सोचते रहोगे तो ऐक्शन कब लोगे? खुद से “यदि ऐसा हो गया तो?” पूछना तुम्हें केवल एक ही जगह ले जा सकता है, जहां तुम जाना नहीं चाहते, जहां जाना तुम्हारी ज़रूरत नहीं है. लेकिन तुम्हारे प्लान्स बिल्कुल पक्के होने चाहिए, उनमें सभी संभावनाओं के लिए स्कोप होना ज़रूरी है. चिंतित होने के कारण खोजते रहना और भविष्य को ध्यान में रखते हुए सारी संभावनाओं की दृष्टि से रणनीति बनाने के अंतर को जान लेना तुम्हारे लिए ज़रूरी है.

8. अपनी एक्सरसाइज़ और नींद पर ध्यान दो

अच्छी नींद के महत्व पर मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता. जब तुम सोते हो तो तुम्हारा दिमाग़ न्यूरॉन्स से वे हानिकारक तत्व निकालता है जो जाग्रत अवस्था में बनते रहते हैं. समस्या केवल इतनी ही है कि दिमाग़ ये तत्व तभी निकाल सकता है जब तुम सो रहे हो. यदि तुम अपनी नींद पूरी नहीं करेंगे तो ये हानिकारक तत्व तुम्हारे दिमाग में मौजूद रहेंगे और तुम्हारी सोचविचार की शक्ति को शिथिल कर देंगे. इस नुकसान की भरपाई तुम देर तक जागने के लिए चाय-कॉफ़ी पीकर भी नहीं कर सकते इसलिए भरपूर काम करने के बाद अपने शरीर और दिमाग को पूरा आराम दो.
तुम्हारा आत्म-नियंत्रण, ध्यान और मेमोरी पर्याप्त नींद नहीं मिलने या यही तरीके की नींद नहीं मिलने से घट जाती है. नींद की कमी होने किसी तरह का तनाव नहीं होने पर भी कई प्रकार के स्ट्रेस हॉर्मोन निकलते हैं जो तुम्हारी प्रोडक्टिविटी को किल करते हैं. कभी-कभी यह हो सकता है कि तुम काम के जोश में अपनी नींद को अवॉइड करने लगो, लेकिन ऐसा करना तुम्हारे हित में नहीं है.
Eastern Ontario Research Institute में हुई एक रिसर्च में यह पता चला है कि 10 सप्ताह तक दिन में दो बार एक्सरसाइज़ करनेवाले व्यक्ति अधिक सोशल, एकेडमिक, और एथलेटिक होते हैं. वे अपनी बॉडी-इमेज को लेकर सजग होते हैं और उनके आत्मविश्वास का स्तर भी अधिक होता है. सबसे अच्छी बात यह है कि एक्सरसाइज़ करने से उनके शरीर में बढ़नेवाले लाभदायक हॉर्मोन तत्काल ही शरीर को पॉज़िटिव एनर्जी से भर देते हैं, हालांकि शरीर में होने वाले फ़िज़िकल परिवर्तन भी आत्मविश्वास के लेवल को बू्स्ट करने में सहायक होते हैं.
तुम अपने दिन भर के कामों से तालमेल रखते हुए एक्सरसाइज़ को इस तरह से प्लान करो कि यह छूट नहीं जाए अन्यथा तुम्हारा पूरा दिन वेस्ट हो जाएगा.

9. छोटी-छोटी जीत पर ध्यान केंद्रित करो

जब हम किसी बड़ी चीज़ के होने की उम्मीद कर रहे होते हैं तो छोटी-छोटी सफलताएं बहुत महत्वपूर्ण प्रतीत नहीं होतीं, लेकिन यही छोटी-छोटी सफलताएं हमारे दिमाग के रिवार्ड और मोटीवेशन से प्रभावित होनेवाले सेंटर को सक्रिय करती हैं. दिमाग में होनेवाली यह हलचल से शरीर में टेस्टोस्टेरॉन नामक हॉर्मोन बनता है जिससे हमारे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और और भविष्य में लिए जानेवाले चैलेंज को उठाने के लिए इच्छाशक्ति मिलती है. छोटी-छोटी सफलताएं अर्जित करने से मन में बढ़नेवाला आत्मविश्वास कई महीनों तक बना रहता है.

10. परफ़ेक्शन की खोज मत करो

अपने टारगेट को लेकर परफ़ेक्ट होने की चाह मन में न रखो. परफ़ेक्शन कहीं नहीं होती. कहते हैं कि इंसान गलतियों का पुतला होता है, इसलिए मनुष्य होने के नाते ही हम दोषपूर्ण होते हैं. यदि तुमने मन में परफे़क्ट होने की ठान रखी हो तो असफलता का एक तंतु ही आपको हताश करने के लिए काफ़ी होगा. ऐसे में तुम यही विचारते रह जाते हो कि तुम असफल कैसे हो गए और तुम्हें कैसी गलतियां कर दीं. यदि तुमने परफ़ेक्ट मंसूबे नहीं बनाए होते तो तुम मामूली असफलता से निराश नहीं होते और अपनी छोटी सफलताओं से प्रोत्साहित होकर भविष्य में उससे भी बेहतर की ओर कदम बढ़ाते.

11. समस्याओं के हल पर फ़ोकस करो

तुम्हारी मानसिक दशा का पता इससे चलता है कि तुम अपना ध्यान कहां केंद्रित करते हो. यदि तुम सारा फोकस समस्याओं पर करते हो तो तुम देर तक नहीं छंटनेवाली निगेटिव भावनाओं की रचना करते हो जो तुम्हारी लक्ष्यप्राप्ति के आड़े आ जाती हैं. जब तुम की जानेवाली ज़रूरी कार्रवाई पर फ़ोकस करते हो तो तुम खुद को सुधारते हो और परिस्तिथियों में ऐसे बदलाव लाने की कोशिश करते हो जिनसे पॉज़िटिव भावनाएं जाग्रित होती हैं और परफॉर्मेंस सुधरती है.

12. खुद को माफ़ करना सीखो

तुमसे जब गलतियां हो जाएं तो मुनासिब यही है कि तुम उनसे सबक लो और शर्मिंदा होने की बजाय खुद को माफ़ करके आगे बढ़ जाओ. गिरने पर लगनेवाली चोट के दर्द को सहो, उसकी परवाह और इलाज़ करो लेकिन उसे अपने मन का नासूर मत बनने दो. अपना ध्यान उस बात में लगाओ कि आइंदा तुम उस गलती या असफलता को दोहराने मत दो.
असफलताएं हमारे आत्मविश्वास को तोड़ सकती हैं. ये तुम्हारे मन में ये बता बिठा सकती हैं कि तुम किसी भी चीज के लायक नहीं हो. असफलताएं तभी आती हैं जब तुम कोई रिस्क लेते हो या उस चीज़ को पाना चाहते हो जिसे पाना कठिन है. असफलताओं से दो-चार होते हुए सफलता को प्राप्त करने में ही तुम्हारी असली परीक्षा है, और यह तुम अतीत में रहकर नहीं कर सकते. किसी कीमती चीज़ को प्राप्त करने के लिए तुम्हें गिर-गिर कर उठना होगा, रिस्क लेने होंगे. तुम असफलताओं को यह अधिकार न दो कि वे तुम्हारी योग्यताओं पर हावी हो जाएं. यदि तुम हमेशा अतीत में ही रहोगे तो तुम्हारा अतीत ही तुम्हारा वर्तमान बन जाएगा, जो तुम्हें कभी आगे नहीं बढ़ने देगा.
मैं आशा करता हूं कि ऊपर बताए गए सबक पर ध्यान देने से आपको लाभ होगा क्योंकि मैं वर्षों तक इन्हें अपनाता रहा हूं और इन्होंने सफल आंत्रपेन्यूर बनने में मेरी सहायता की है. सफलता के ये सूत्र बहुत शक्तिशाली हैं और मैं इनपर हमेशा मनन करता रहता हूं.
अपने कैरियर को आकार देने के दौरान आपने कौन से सबक सीखे? कमेंट्स में अपने अनुभव शेयर करें क्योंकि इससे हम सबको एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.

travis_bradberryDr. Travis Bradberry is the award-winning co-author of the #1 bestselling book, Emotional Intelligence 2.0, and the cofounder of TalentSmart, the world’s leading provider of emotional intelligence tests and training, serving more than 75% of Fortune 500 companies. His bestselling books have been translated into 25 languages and are available in more than 150 countries. Dr. Bradberry has written for, or been covered by, Newsweek, TIME, BusinessWeek, Fortune, Forbes, Fast Company, Inc., USA Today, The Wall Street Journal, The Washington Post, and The Harvard Business Review.


Thursday, 2 June 2016

सकारात्मक सोच से आता है बड़ा बदलाव Brea change comes from positive thinking

जीवन में हर किसी को एक  अच्छा मेंटर  मिले यह जरुरि नहीं  है. बहुत लोग ऐसे भी होते है , जिनका पारिवारिक पृष्टभूमि आर्थिक  और  एजुकेशनल  कंडीशन ठीक नहीं है ,   रूप सेव बहुत ठोस नहीं है .  इसके बाद भी ओ सफल होते है और उदाहरण बन जाते है . यह सब कैसे होता है ?   क्या यह हर किसी के लिए  संभव है?  जबाब होगा हां. अगर आप सकारात्मक  सोच और खुद पर  भरोशा रखते है , तो आप खुद कि बदौलत भी वह उपलब्धि हस्सिल कर सकते है, जिसे विशेस मार्गदर्शन से कोई प्राप्त करता है . आत्म्बिश्वासी  कभी  निराश  या हताश नहीं होते . इसे याद रखे ./
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सकारात्मक  सोच से आता है बड़ा बदलाव  Brea change comes from positive thinking

सकारात्मक  सोच से आता है बड़ा बदलाव  Brea change comes from positive thinking



1. निगेटिव बाते करना बंद करे 

Image result for isaan imageयह  संभव  है कि जब  आप कैरिएर  के शेत्र में कोई बड़ा  कदम  उठाते है , तब आपको प्रोत्साहित करने और आपना मार्गदर्सन  करने वाला कोई न हो. आपके मित्र और परिवार के सदस्य भी इस स्थिति में न हो कि आपका रह दिखा सकते  हो, ऐसे समय में अक्सार देखा गया है कि  व्यक्ति कई प्रकार के नकारात्मक  पर्स्नो से घिर जाता है . इन पर्स्नो को वे खुद ब खुद पैदा करता है . और खुद को उसकी जद में कैद करता चला जाता है. इससे उसकी सकारात्मक शक्तिया   कमजोर होति है. और वह भ्रम व् सशय का शिकार होने लगता है.. इसके बिपरीत जो इनसान खुद से  साकारात्मक  प्रश्न करता है , तो उसके आत्म्बिश्वास  में बढ़ोतरी होति है . इसलिए खुद से सकारात्मक बात करना सीखे .
नकारात्मक पर्स्नो से बचे  आगरा एषा करना बहुत आसान न हो , तो कागज -कलम  उठाये और सभि नकारात्मक पर्स्नो को लिखना शुरू कर दे . एषा करने से आप  नकारात्मक प्रश्नों  का प्रवाह थम जायेगा  और आप आपने दिमाग के दूसरी दिशा में आसानी  से मोर सकेंगे . यह आपको तार्किक भी बनाएगा  और सकारात्मक सोच के लिए  प्रेरित व्भी करेगा .


2. कल्पना के पीछे न भागे .

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 कभी भी  काल्पनिक  संभावनाओ का  पीछा न करे. 
 जैसे कि यह सोचना कि ' अगर ऐसा हो जाता '.
यह  हैपोथेतिकल स्टेटमेंट  है. इसमें जराभी यतार्थ नहीं होता है , बल्कि  यह  आपकी चिंता  और तनाव को भार्काता है .यह आपकी प्रगति कि राह में बाधक बनता है है . यह  और आपकी क्षमता को कम करता है . संघर्स और क्ष्रम  करने के आपके संकल्प को कमजोर करता है / बनता है. इसलिए ऐसे किसी  बिचार के प्रभाव में न आये . सपना देखना और काल्पनिक बातो में उलझना , ये दोनों दो बाते है .
सपने देखना चाहिए ऐसे सपने जिसे  रियल में बदला जा सकता है .
 ऐसी काल्पनिक बातो को नहीं सोचना चाहिए  जिसके सुच होने का कोई अधर नहीं है .
चाहे ओ बात नकारात्मक हो या सकारात्मक .
जैसे कि ' अगर एषा होता, तो कितन अच्छा होता' और ' कही ऐसा तो नहीं हो जायेगा ' ये दोनों हि काल्पनिक बिचार है  और इनसे सिवाय नुक्सान के कुछ भी हासिल नहीं  होता है.



3. नींद पर ध्यान दे .

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 अच्छी नींद के महत्त्व को पर कभी कमतर न आंके .  आप जब सोते है , तो आपके दिमाग नेयूरौंस से वे हानिकारक तत्व निकलते है , जो कि जागृत अवस्था में बनता है . समस्या इतनी हि है कि दिमाग ये तत्व तभी निकाल सकता है  , जब तुम सो रहे हो .  यदि आप आणि नींद पूरी नहीं करेंगे , तो ये हानिकारक तत्व आपने दिमाग में मजूद रहेंगे , और आपके सोच बिचार के सकती को शिथिल कर देंगे . इस नुक्सान कि भरपाई  आप देर तक  जागने के लिए चाय कॉफी पि कर भी नहीं कर सकते है . इसलिए भरपूर काम करने के बाद आप आपने  सशिर को भरपूर आराम दे  और दिमाग को पूरा आराम भी दे .
 आपका  आत्म - नियंत्रण , ध्यान और मेमोरी  पर्याप्त नींद नहीं  मिलने  या यही  तरीके  कि नींद नहीं मिलने  से घाट जाती है . नींद  कि कमी  होने  पर  किसी  तरह  का  तनाव  नहीं होने पर भी कई प्रकार के सट्रेस हार्मोन निकलता है , जो आपकी prodqviti को किल करता है .
कभी कभी ऐसा होता है कि आप काम कि जोश में  आपनी नींद को नदेखी करने लगते है . लेकिन एषा करना आपके हित में नही है INSTRN ONTERIYO RISEARCH INSTITUDE में  हुई एक रिसर्च से यह पत चला कि  १० सप्ताह तक दिन में  दो बार EXERSIZE करनेवाले  व्यक्ति  अधिक सोशल , अकेडमिक  और एथलेटिक  होते है  , और उनके आत्म्बिश्वास भी अधिक होता है  वे आपनी बॉडी image के लेकर सजग होते है  और उनके आत्म्बिश्वास का भी स्तर बहुत अच्छा होता है.
 सबसे अच्छी बात यह है कि  exersize करने से उनके  शारीर में बध्नेवाले  लाब्व्ह्दायक हार्मोन तत्काल हि सरीर में को positive energy se bhar dete hai . हलाकि शारीर में बढ़नेवाले  लाभदायक हार्मोन  तुरंत पॉजिटिव एनर्जी से भर देता है.हालाँकि शारीर में होने वाले फिजिकल परिवर्तन भी आत्म्बिस्वास के लेवल को बस्ट करने  में  सहायक होते है . आप आपने दिन  भर के काम से तालमेल रखते हुए EXCERSIZE  को इस तरह से प्लेन करे कि यह छुट नहीं जाएँ .  अन्यथा आपका पूरा दिन बर्वाद हो जायेगा .


4. छोटी   छोटी  जित पर केन्द्रित करे 


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जब हम किसी  बड़ी चीज के होने कि ऊम्मीद  कर रहे  होते है , तो छोटी- छोटी सफलताये  बहुत महत्वपूर्ण  प्रतीत  नहीं होति, लेकिन यही छोटी- छोटी सफलताये  हमरे दिमाग  के रिवार्ड  और मोटिवेशन  से  प्रभावित   होनेवाले   सेण्टर  को सक्रिय करती है . दिमाग में  होनेवाली  इस हलचल  से शारीर में testoran नमक हार्मोन बनता है .  जिससे हमारे आत्म्बिस्वाश में ब्रिधि  होति है  और भविष्य के लिए   जानेवाले  बदलाव को उठाने के लिए  इचाचासक्ति मिलती है . छोटी छोटी   सफलताये अर्जित करने से मन में  बध्नेवाले आताम्विश्वास कई महीनो तक बना रहता है .






5 . परफेक्शन कि खोज न करे .


आपने टारगेट को लेकर आपने मन में छह ना रखे . परफेक्शन कही नहीं होति है . कहते है कि इनसान गलतियों का पुतला होता है , इसलिए हम मनुष्य होने के नाते हम दोस पूर्ण होते है .अगर आप आपने मन में परफेक्ट होने कि थान रखी है तो , आपको असफलता का एक हि तंतु आपको हाताश कर देगा . भविष्य में उस से बेहतर कि और कदम बढ़ाते है.






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