Saturday, 3 December 2016

ladki ko parpose kaise kare same kaise kare

Ladki Ko Propose Kaise Kare – लड़की को प्रपोज़ कैसे करे

Ladki Ko Propose Kaise Kare
Ladki Ko Propose Kaise Kare

Ladki Ko Propose Kaise Kare

Aksar ladke Ladki ko propose karne main hichkichate hain. Tab unke men main ajeeb sa der paida ho jate  hain, aap jab kisi Ladki ko propose karne ke bare main sochte hain toh usse pehle apke men main bahut se negative vichar aate hain. Kahi wo dant na de ya fir thapad na maar de or sabse badi baat toh ye ki kahi wo na na krde aur na krne ke baad sabko bataye na ki isne mujhe propose kiya tha maine na kardi isse insult hogi meri. Lekin ye galat soch hai aisa nahi hota. Dhyan rakhe ladki tab tak galat behavior nahi karti jab tak aap uske sath tameej se pesh aa rahe hain. Apne men se sara der nikal de aur usko propose kare. Jo log apni dil ki baat dil se nikalkr apne samne wali ko bolte hain wahi asali main real champion hote hain. Chaliye jaane Ladki Ko Propose Kaise Kare.

Khud pehal kare

Kayi ladke sochte hain ki unhone ladki ko impress toh kar hi liya hai aur iske baad ladki khud pehal karegi. Agar aap bhi aisa sochker baite hain, toh ye aapki sabse badi galafehami hai. Wo apko pasand karti bhi hogi toh pehal nahi karegi. Bahut rare hi chance hota hai ki ladki pehal kare. Isliye apko jab bhi mauka mile, aap ladki se apne dil ki baat keh dale. Aap Ladki Ko Propose karne main der na kare.

Friendly close ho jaye

Aap ladki ke friend circle main shameel hon aur uske dosto se baat kare. Ladki un ladko ko behad pasand karti hai jo uske dosto se har subject par baat karte hain. Agar wo apse kisi subject per help chahti hai toh aap issi bahane badi sehajta ke sath uska mobile number mang sakte hain. Aap hur subject khulker baat kare usse, jaise wo apse hur baat share karne lage aur apse impress ho jaye. Aap Ladki Ko Propose karna chahte hain, lekin usko dekhte hi apki bolti band ho jati hai. Iska matlab ye hai ki aap usko bahut chahte hain, usko khone ke der se aap usko purpose nahi ker paa rahe hain ghabra rahe hain apka confidence level kum ho jata hai.

Intzaar ka fal mitha hota hai

Aap ladki ko flirt ya fir time pass ke liye purpose na kare. Agar aap real main serious hoge, toh yeh baat apke chehre or word main saaf dikhegi. Uske sath sexual communication suru karna chahte hain aur chahte hain ki wo bhi aap main aisi hi interest le. Agar wo apko touch karti hai, toh aap usse majak main kahe, tum mujhe aajkal bahut touch karne lagi ho ya tumne konsa perfume lagaya hai. Iski khusboo bahut achi hain. Aap uske sath boyfriend ki tarah treat na kare, usko flower, chocolate gifts or vagehra na de. Aisa karke aap apni jaldbaazi jahir karege, jisse aapka kaam kharab ho jayega
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Wednesday, 23 November 2016

गरीब छात्रों को IIT तक पहुँचाने वाले Super 30 फाउंडर आनंद कुमार की दास्तान

गरीब छात्रों को IIT तक पहुँचाने वाले Super 30 फाउंडर आनंद कुमार की दास्तान

आप में से ज्यादातर लोगों ने life में कभी न कभी कोई coaching classes ज़रूर attend की होगी। और कुछ ने IIT और अन्य engineering colleges के लिए भी तैयारी की होगी। आप लकी थे कि आपके parents coaching की भारी भरकम fees afford कर पाए, लेकिन भारत में ऐसे करोड़ों बच्चे हैं जिनके माता-पिता अपने बच्चों को कोचिंग में नहीं भेज पाते। और ऐसे ही कुछ प्रतिभाशाली बच्चों के लिए बिहार का एक शख्श अँधेरे में रौशनी की किरण का काम करता है।
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं Super 30 के संस्थापक आनन्द कुमार जी के बारे में जो बिना एक पैसे शुल्क लिए गरीब प्रतिभाशाली बच्चों का IIT जाने का सपना साकार करते हैं। आइये जानते हैं उनकी कहानी।
Anand Kumar Super 30 Success Story in Hindi आनंद कुमार सुपर 30

Super 30 के founder आनन्द कुमार जी की सक्सेस स्टोरी

Supr 30 Founder Anand Kumar Biography in Hindi

क्या है Super 30?

Super 30 आनंद जी का स्टार्ट किया हुआ एक प्रोग्राम है जिसके अंतर्गत वे हर साल पूरे बिहार* से ३० ऐसे बच्चों को चुनते हैं जो प्रतिभाशाली हैं पर साथ ही इतने गरीब हैं कि उनके माता-पिता उनको ठीक से पढ़ा-लिखा नहीं सकते। आनंद जी एक परीक्षा के माध्यम से ऐसे बच्चों का चयन कर अपने साथ रखते हैं और उनकी पढाई-लिखाई से लेकर खाना-पीना रहना…हर एक चीज का खर्च खुद उठाते हैं।
इस काम में उन्हें अपने छोटे भाई Pranav और अपनी माँ जयंती देवी, जो बच्चों के लिए खाना बनाती हैं, से मदद मिलती है। गणित विषय आनंद जी खुद ही पढ़ाते हैं जबकि फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ाने के लिए उन्हें पुराने छात्रों से मदद मिल जाती है।
पटना में 2002 में शुरू हुए इस प्रोग्राम के अंतर्गत हर साल 28-30 बच्चे IIT में चयनित होते हैं। IIT में प्रवेश पाना कितना कठिन है ये हम सब जानते हैं बावजूद इसके हर साल लगभग 100% रिजल्ट देना सचमुच किसी चमत्कार से कम नहीं है और अब तो पूरी दुनिया भी इस चमत्कार को  acknowledge करती है।
Time Magazine ने आनंद कुमार जी की Super 30 classes को Asia के best school की list में शामिल किया है और Discovery channel भी उनके इस unique initiative पर documentary बना चुकी है।
*अब वे अन्य राज्यों से भी बच्चों को लेने लगे हैं और साथ ही उनकी 30 से अधिक छात्रों को लेने की मंशा है।

आनंद कुमार का छात्र जीवन और संघर्ष 

Super 30 के संस्थापक आनंद कुमार जी का बचपन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा । इनका जन्म 1 January 1973 को पटना में हुआ था। इनके पिता डाक विभाग में क्लर्क थे । पिता की तनख्वाह में घर का खर्च किसी तरह से तो चल जा रहा था लेकिन इतनी income नहीं थी कि आनन्द का एडमिशन किसी अच्छे स्कूल में करा सके ।
इनकी स्कूली शिक्षा की शुरुआत सरकारी स्कूल से हुई । Talent के धनी आनन्द जी का मनपसन्द subject Math था । लेकिन इनका talent आर्थिक तंगी के बोझ तले दब जा रहा था । पिताजी की मृत्यु के बाद घर चलाने के लिए माताजी पापड़ बनाती और आनंद साइकल पर सवार हो झोले में पापड़ रख जगह-जगह पहुंचाने और बेचने का काम करने लगे। कई बार जब पापड़ नहीं बिकते तो परिवार के पास खाने के भी पैसे नहीं हो पाते और सभी को भूखे पेट सोना पड़ता।
जब एक बार उनसे “गरीबी” के बारे में बताने के लिए कहा गया तो वे बोले-
गरीबी कोई बताने की चीज नहीं है ये महसूस करने की चीज है…अगर गरीबी को महसूस करना है तो एक-दो दिन भूखे रह कर देखो….
आनंद चाहते तो पिताजी की मृत्यु के बाद उनकी जगह पर उन्हें सरकारी नौकरी मिल सकती थी…पर बचपन से ही Maths teacher बनने का सपना देखने वाले आनंद ने सोचा कि अगर वे इस चक्कर में पड़े तो कभी भी उनका सपना पूरा नहीं हो पायेगा और उन्होंने नौकरी नहीं की।
आनंद जी अपने रास्ते में आये काटे को भी काटा नहीं फूल समझे और उनकी यही विशेषता उनका संबल बनता गया । अपने इसी संबल की वजह से 1994 में इन्हें Cambridge University में जाने का मौका मिला पर गरीबी के कारण उनका ये सपना टूट गया।
इसके बावजूद आनन्द जी ने हार नहीं मानी, वे दिन के समय Mathematics पर काम करते थे और शाम के समय अपनी माँ के पापड़ बेचने के व्यवसाय में मदद करते थे । इसके अलावा अपने परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए Tuition भी पढ़ाते थे । उस समय Patna University में Maths के foreign journals उपलब्ध नहीं थे इसलिए आनन्द जी सप्ताह के अंत में 6 घंटे का ट्रेन द्वारा सफर करके वाराणसी जाते थे और BHU की Central Library में Maths के foreign journals पढ़ते थे और सोमवार सुबह पटना लौट जाते थे ।

पढ़ाने की शुरुआत

1992 में आनन्द जी Mathematics की कोचिंग शुरू की और अपने institute का नाम रखा Ramanujan School of Mathematics. उनके पढ़ाने का style और विषय पर पकड़ इतनी अच्छी थी कि कुछ ही समय के अंदर उनकी ख्याति दूर दूर तक फ़ैल गयी। कुछ छात्रों से शुरू हुई coaching बढ़ते बढ़ते 500 छात्रों तक पहुँच गयी।

Super 30 की शुरुआत और उसके पीछे की प्रेरणा

आनंद जी स्वयं एक प्रतिभाशाली छात्र थे औ इसी के बल पर उनका चयन दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित Universities में से एक Cambridge University में हो गया था। पर गरीबी के कारण वे खुद वहां जाने का खर्च नहीं उठा सकते थे और समाज से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली…बचपन से गरीबी का दर्द झेल रहे आनंद ने मन ही मन फैसला किया कि वे ऐसे ज़रुरत मंद बच्चों के लिए ज़रूर कुछ करेंगे। और आगे चल कर जब आनंद जी ” Ramanujan School of Mathematics” नाम से एक ट्यूशन सेंटर चला रहे थे तब एक दिन बिहार शरीफ का एक छात्र उनके पास आया और बोला कि,” मेरे पास पैसे नहीं हैं क्या मैं आपसे पढ़ सकता हूँ…मैं बाद में जब बाउजी खेत से आलू उखाड़ेंगे तब पैसे दे दूंगा….”
बच्चे की ये बात आनंद जी के दिल को छू गयी और उसी पल उन्होंने Super 30 की शुरुआत करने का फैसला किया।
 आनन्द जी का मानना है कि-
पढाई – लिखाई का लाभ हम अकेले ही उठाते रहे और दूसरों का उससे कुछ भला न हो तो ऐसी पढाई – लिखाई किस काम की । शिक्षा की उपयोगिता तभी है जब उसका अधिक से अधिक लाभ दूसरों को मिले ।

कैसे उठाते हैं बच्चों के रहने, खाने-पीने इत्यादि का खर्च?

आनंद और उनकी टीम कभी भी Super 30 के लिए कोई donation नहीं लेती बल्कि वे normal tuition classes से होने वाली कमाई को ही इन ज़रुरतमंद बच्चों की आवश्यकताएं पूरी करने में लगाती है।

Free कोचिंग का विरोध!

शायद आप सोचें कि भला कोई इसका विरोध क्यों करेगा….लेकिन आनंद कुमार जी जहाँ एक तरफ फ्री में बच्चों को IIT में प्रवेश दिला रहे थे वहीँ महंगी-महंगी कोचिंग वाले इतने पैसे लेकर भी अच्छा रिजल्ट नहीं दे पा रहे थे। इसलिए पहले आनंद जी को ये सब बंद करने की धमकी मिली और नहीं मानने पर उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। पर फिर भी वो वही करते रहे जो वो करना चाहते थे, सचमुच उनके जज्बे और हिम्मत की दाद देनी होगी।

इस कामयाबी का श्रेय किसे देते हैं?

सभी को..पूरी टीम को…खासतौर से इन बच्चों को जो रोज 16-16 घंटे पढाई करते हैं।

Bollywood से सम्बन्ध

Anand Kumar Super 30 Success Story in Hindi आनंद कुमार सुपर 30
Mr. Anand with Mr. Bachchan
Prakash Jha आनंद जी के जीवन पर एक फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन लक्ष्य सी भटकने के डर से आनंद जी ने ऐसे किसी प्रोजेक्ट के लिए मना कर दिया। हालांकि, उन्होंने “आरक्षण” फिल्म में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को उनका रोल तैयार करने में मदद की थी।

सरकार से अपील

IITJEE प्रवेश परीक्षा का लेवल बहुत कठिन होता है जिसके लिए कई बार कोचिंग जाना मजबूरी बन जाती है और गरीब छात्र यहाँ मात खा जाते हैं। इसलिए इस परीक्षा का level क्लास 12th के हिसाब से होना चाहिए और स्टूडेंट्स को कम से कम ३ मौके मिलने चाहिए.

जीवन का लक्ष्य

कभी किसी पढने वाले बच्चे की पैसों के चलते पढाई न रुके।

छात्रों और युवाओं के लिए सन्देश

मेहनत करो…निराश मत हो…हमेशा ये सोचो कि लाइफ में अन्धकार आता है…तकलीफें आती हैं…ये part of life है। अँधेरा जितना गहरा होता है…खुश हो कि नयी सुबह उतनी ही करीब है….बस शर्त इतनी है कि “मेहनत करो” मेहनत करोगे तो एक न एक दिन तुम्हारे जीवन में  प्रकाश ज़रूर आएगा।
“बुझी हुई शमा फिर से जल सकती है
भयंकर तूफ़ान से भी कश्ती निकल सकती है
निराश न हो दोस्तों….एक दिन अपनी भी किस्मत बदल सकती है।
अधिक जानकारी के लिए सुपर ३० की साईट देखें या Wikipedia पर उनके बारे में पढ़ें. आप YouTube पे उनका इंटरव्यू भी देख सकते हैं.
Thank You
Babita Singh
Jointly written by Babita Singh from KhayalRakhe.Com & Gopal Mishra
बबीता जी by profession एक टीचर हैं और साथ ही वे एक NGO से जुड़कर  women empowerment के लिए काम करती हैं. अपने ब्लॉग के माध्यम से वे महिलाओं से जुड़ी स्वास्थय समस्याओं के बारे में लोगों को aware करना चाहती हैं।

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Saturday, 12 November 2016

विश्वासघात पर हिंदी कहानी

Hindi Story on Betrayal

विश्वासघात पर हिंदी कहानी

“मॉम .!!… “मैं सोच रही थी! कि आज रात को मैं शिखा के घर पर ही रुक जाऊंगी…थोडी़ कम्बाइन्ड स्टडी करनी है, वो परसों मैथ्स का टेस्ट है ना उसी की तैयारी करनी है”। किताबें समेंटते हुए चारू बोलती जा रही थी!
Hindi Story on Betrayal विश्वासघात हिंदी कहानी“पर बेटा ..रात को ..किसी के घर रुकना मुझे तो ठीक नहीं लगता।”
“मॉम!!”, नाराज होती हुई चारू ने कहा,  “देखो ना पापा मां जाने नहीं दे रहीं।।
पापा माँ पर नाराज़ होते हुए बोले, “अरे रुक जाने दो ना चारू को उसकी सहेली के घर, एक रात की ही तो बात है। अपने बच्चों पर विश्वास करना सीखो!, जाओ बेटा”! जाओ!”
चारू ने पापा को थैंक्स कहा और अपनी स्कूटी से निकल गयी।
रात का एक बजा था, फोन की घनघनाहट सुन कर वर्मा जी घबरा कर उठे, फोन पर आवाज आयी, “मि. वर्मा आप तुरन्त थाना गांधी नगर आने का कष्ट करें।”
यह सुनकर वर्मा जी की सांसें गले में अटक गयीं, डर रहे थे की कहीं कोई अनहोनी ना हुई हो…कहीं बेटी को तो कुछ……. बदहवास थाने पहुंचे,देखा दस-पंद्रह लड़के लड़कियां मुंह छिपाये बैठे थे उनमें अपनी चारू को पहचानने में जरा भी देर नहीं लगी।
“देखिये वर्मा जी!!! ये बच्चे दिल्ली के बाहर एक फार्म हाउस में ड्रग्स के साथ रेव पार्टी करते हुए पकडे़ गये हैं!
आप लोग ना जाने अपने बच्चों को कैसे संस्कार देते हैं….ना जाने इतनी रात गए घर से बाहर निकलने की परमिशन कैसे दे देते हैं आप लोग….शर्म आनी चाहिए!
वर्मा जी शर्म का सिर शर्म से झुका जा रहा था, वो बस एक ही बात सोच रहे थे….जब उन्होंने अपनी बेटी पर इतना विश्वास किया तो आखिर क्यों उनकी बेटी ने उनके साथ विश्वासघात कर दिया!
दोस्तों, इस दुनिया में कोई है जो आपका सबसे अधिक ध्यान रखता है, सबसे अधिक आपका भला चाहता है…. तो वो आपके parents हैं। वो आपको ऊपर से सख्त लग सकते हैं पर उनके भीतर आपके लिए आपार प्रेम होता है और कभी भी आपको उस प्रेम का नाजायज़ फायदा नहीं उठाना चाहिए…कभी भी आपको उनके विश्वास के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए!
sunita-tyagi
धन्यवाद! 
सुनीता त्यागी
पता: जागृतिविहार मेरठ
शिक्षा: परास्नातक
उपलब्धि: राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लघुकथाओं का प्रकाशन।
We are grateful to Sunita Ji for sharing this Hindi Story on Betrayal ( विश्वासघात पर कहानी ). Thanks Ma’am

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ShopClues Founder Radhika Aggarwal Success Story in Hindi शॉपक्लूज संस्थापक राधिका अग्रवाल के सफलता की कहानी



ShopClues Founder Radhika Aggarwal Success Story in Hindi

शॉपक्लूज संस्थापक राधिका अग्रवाल के सफलता की कहानी 

किसी ने ठीक ही कहा है एक सपना जादू से हकीकत नहीं बन सकता, इसमें पसीना, दृढ संकल्प  और कड़ी मेहनत लगती है।
ज़िन्दगी बहुत छोटी है कुछ कर गुजरने के लिए। उससे भी छोटी वो तब हो जाती है जब इस पुरुषवादी समाज में एक महिला ऊँची उड़ान भरने के सपने देखती है और अगर कोई ऐसा कर जाए तो अक्सर उसे मेहनत या लगन नहीं बल्कि अच्छी किस्मत या फिर किसी चमत्कार का नाम दे दिया जाता है।
लेकिन कहते है ना कि हर एक महान सपने की शुरुआत एक स्वप्नद्रष्टा से होती है। अगर हम याद रखें कि हमारे अंदर वो ताकत है, धैर्य है, और जज़्बा है कि हम सितारों को छू सकें और इस दुनिया को बदल दें तो कोई भी समाज या कितनी भी छोटी ज़िन्दगी हमे रोक नहीं सकती। और आज मैं आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रही हूँ जिन्होंने अपने दम पर, अपने जज़्बे के बलबूते एक मिसाल कायम कर दी है।
ShopClues Founder Radhika Aggarwal Success Story in Hindi
Radhika Aggarwal
मैं बात कर रही हूँ ShopClues कंपनी की को-फाउंडर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर राधिका अग्रवाल की। राधिका अपने आप में ही women empowerment और “आज की नारी सब पर भारी” का बहुत बड़ा example हैं।
भारत की सबसे जानी मानी और सफल online shopping websites में से एक Shopclues की शुरुवात इन्होंने 2011 में गुडगाँव में की थी। 10 लोगो से शुरू हुई यह company आज की सबसे सफल e-commerce websites में से एक है। आज ShopClues में 1000 से अधिक employees काम करते हैं और हर महीने यह लगभग 80 करोड़ रुपये का कारोबार करती है। Shopclues की strong foundation की वजह से Venture Capital Funding के अंतर्गत इन्हें $100Mn की फंडिंग भी मिली है।

Radhika Aggarwal का बचपन

राधिका के पिता सेना में थे और माँ एक डायटीशीयन थीं। पिताजी की transferable job होने के कारण राधिका ने भारत के लगभग 10 स्कूलों से पढाई की और बुनियादी जीवन कौशल और सामाजिक कौशल जल्दी सीख लिया। अच्छे शिक्षकों के बीच मध्य मार्ग पर चलने वाली राधिका ने सीख लिया कि किसी भी अवसर का किस तरह से भरपूर फ़ायदा उठाते हैं। उनके  social skills और नए दोस्त बनाने की प्रतिभा ने जल्दी ही उनके व्यक्तित्व को ढाला।
राधिका के पिता ने अपनी सेना की नौकरी पूरी होने के बाद खुद को entrepreneurship की ओर मोड़ा। पिता के बिजनेस में आने से राधिका भी छोटी उम्र में ही बिजनेस सम्बन्धी बातों को समझने लगीं।

शिक्षा व नौकरी

राधिका ने Advertising और Public Relation में पोस्ट ग्रेजुएशन की। साल 1997 और 1999 के बीच उन्होंने अपनी खुद की एक विज्ञापन एजेंसी चलायी। उन्होंने कहा कि-
“समस्या को हल करने के लिए या फिर जिस तरह से हम entrepreneurship को आज देखते हैं, उससे इसका कोई तालुक्क नहीं था। यह बस मेरा खुद का मालिक बनने के लिए उठाया कदम था।”
साल 1999 में वे MBA करने The US चली गयीं । फिर उन्होंने Washington University St. Louis से अपनी MBA की पढाई पूरी की साल 2000 में जल्दी ही वे नामी-गिरामी financial firm Goldman Sachs में शामिल हो गयीं, लेकिन अगले साल ही वे Nordstrom में शामिल हो गयी जो Walmart की तरह ही अमेरिका की एक प्रतिष्ठित departmental stores की चेन है।
Nordstrom में उन्होंने काफी कुछ सीखा। सिर्फ strategic planning ही नहीं बल्कि यह भी सीखा कि कैसे इनवर्टेड पिरामिड संरचना एक संगठन में वास्तव में प्रैक्टिस होती है। Nordstrom में ग्राहक Inverted Pyramid के शीर्ष पर और C.E.O उसके तल पर है।
राधिका ने 2006 तक इस कंपनी में काम किया और इसके बाद खुद Fashion Clues नाम की website शुरू की जिसमें उन्होंने South Asia और The US को target किया। इस कंपनी को उन्होंने अकेले ही संभाला।

Shopclues की शुरुआत

Nordstorm के experience और  Fashion Clues को रन करने से मिली सीख से लैस होकर राधिका ने 2011 में ShopClues की नीव डाली।
राधिका के हिसाब से भारत में ग्राहकों की मानसिकता काफी अलग है जो की अपने आप में एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है।
वो कहती हैं-
ग्राहकों में विश्वास की कमी है, और इसका valid reason भी है।
उनकी कंपनी काफी customer focused रहती है और अपनी buyer protection policy के अंतर्गत वे ग्राहकों को सामान वापस करने की आसन सहूलियत देती हैं, जिससे customer confidence build up होता है।
राधिका कहती हैं-
ग्राहक अनुभव महत्वपूर्ण है, खासकर जब कोई बात बिगड़ जाए।
Shopclues पर पहली बड़ी चुनौती के बारे में याद करते हुए वे बताती हैं कि हमारे पहले वेलेंटाइन डे के लिए हमें फूलों के 200 बुके चाहिए थे। उस दिन उनके वेंडर ने माल उन्हें सप्लाई करने की बजाये खुद ही सारे फूल बेच डाले।
इसे ठीक करने के लिए, हम बाहर गए और फूलों की जगह हमने soft toys और चॉकलेट भेज दिए और साथ ही customers से माफ़ी भी मांग ली।मतलब, बात बिगड़ जाती है लेकिन ऐसे समय में आप कैसी प्रतिक्रिया देते हैं ये मायने रखता है।
राधिका शॉपक्लूज को अपना तीसरा बच्चा मानती है और पूरी लगन से काम करती हैं। पर इसके साथ-साथ ही वे अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बना कर चलती है। वे जहाँ भी होती है उस समय उस चीज़ पर एकदम केंद्रित रहती हैं…office में बस office का काम और घर पे सिर्फ परिवार को समय देना।
उन्होंने महिला कर्मचारियों के बारे में बताया कि Women’s Day के दिन staff की सारी महिलाओं को एकत्रित करती हैं और उन्हें मौका देती हैं कि वे उनकी परेशानी और चुनोतियों के बारे में बात करें।
राधिका को एक बार किसी महिला कर्मचारी ने बताया कि उसके परिवार में वो  पहली महिला थी जिसने जीन्स पहनी और घर से बहार जाकर नौकरी की और उसने Shopclues इसलिए ज्वाइन किया क्योंकि उसकी co – founder एक महिला थी। तो इस तरह से एक महिला की आगे बढ़ने की चाह कितनी और महिलाओं को हौसला दे सकती है, कईओं की ज़िन्दगी बदल सकती है… इसलिए राधिका अपने काम को बहुत गंभीरता से लेती हैं।

ShopClues को लेकर राधिका के लिए क्या चीज सबसे ज्यादा मैटर करती है?

इस पर उनका कहना है कि-
मैं उन छोटी-छोटी कहानियों को बहुत cherish करती हूँ, जहाँ ShopClues ने merchants, उनके परिवारों और बाकी stakeholders की ज़िन्दगी को छुआ है…मेरी फेवरेट कहानी उस housewife की है जिसने शॉपक्लूज के through बेचना शुरू किया और फिर उसके husband ने अपनी जॉब छोड़ कर उसे ज्वाइन कर लिया।

Success Mantra

राधिका से उनके Success Mantra पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि-
ज़िन्दगी का हर दिन पिछले दिन से बेहतर होना चाहिए… आज कल से बेहतर होना चाहिए और कल आज से। अगर ज़िन्दगी में इस चीज़ को हम लेकर चले तो सिर्फ आगे बढ़ते जाएंगे।
Friends, तो ये थी Shopclues co-founder Radhika Agarwal की success story. चलिए उनसे inspire होते हुए हम भी हेमशा यही प्रयास करें कि हमारा कल हमारे आज से बेहतर हो!
rajni-bhararaThanks

Rajni Bharara

Blog: HindPatrika.Com

We are grateful to Ms. Rajni for sharing a great success story of an Indian women entrepreneur. We wish her a great future

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